कागजों में बंद अल्ट्रासाउंड सेंटर आज भी हो रहा संचालित
शिकायतकर्ता ने रिपोर्ट के साथ किया दावा
गाजीपुर। स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से जिले में बन्द पड़े अल्ट्रासाउंड सेंटर पर मरीजों की जांच का कार्य जारी है। आखिर यह केन्द्र किसके निर्देश पर कैसे संचालित हो रहा है, इसे लेकर विभाग की किरकीरी हो रही है।
बताया गया है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा कागजों में बंद दिखाया जाने वाला भारत अल्ट्रासाउंड केन्द्र आज भी धड़ल्ले से चल रहा है और सात जून को भी एक रिपोर्ट लेकर शिकायतकर्ता ने अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट को साक्ष्य के रूप में दर्शाया है। इसके बावजूद विभाग के आला अधिकारी उसे बचाने में लगे हैं।
बताते चलें कि नंन्दगंज स्थित भारत अल्ट्रासाउंड सेंटर के डाॅ विनोद कुमार राय की कुछ समय पूर्व ही मौत हो चुकी है लेकिन डॉक्टर के दिवंगत होने के बाद तभी सारे नियमों को ताक पर रखते हुए भारत अल्ट्रासाउंड सेंटर के द्वारा अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पर दिवंगत डाॅक्टर का हस्ताक्षर कर मरीजों को रिपोर्ट दिया जा रहा था। पता चला कि 14 मई को भी एक अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कर के दिया गया था। वहीं 19 मई को भी एक रिपोर्ट है और सात जून की भी पर्ची और रिपोर्ट साक्ष्य के तौर पर मौजूद हैं। वहीं सीएमओ और उनके नोडल द्वारा भारत अल्ट्रासाउंड सेंटर को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। पता चला की जांच को निकले अधिकारियों के वहां पहुंचने से पहले ही इसकी सूचना वहां के संचालकों को मिल जाती है और वह सचेष्ट हो जाते हैं।
सूत्रों की मानें तो शिकायतकर्ता के दावे के बाद अपने को बचाने के लिए एसीएमओ डा. मुंशीलाल ने वहां छापा मारा तो इसकी भनक पाकर पत्रकार भी जा धमके। वहां मेडिकल हाल में एक्स-रे चल रहा था। इस पर एसीएमओ ने पत्रकारों की बात टालते हुए कहा कि मेरा अधिकार मेडिकल चेक करने का नहीं है।
बताते चलें कि इससे पूर्व चार मई को नोडल अधिकारी पी.सी.पी.एन.डी.टी और जिला प्रशासनिक अधिकारी द्वारा आकस्मिक निरीक्षण कराया गया था। उन्होंने अवगत कराया कि उक्त अल्ट्रासाउंड कक्ष का शटर बंद मिला और बगल के कमरे में पैथोलॉजी संचालित किया जा रहा था। इस पर सीएमओ डॉ देश दीपक पाल ने कहा कि अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित अवस्था में पाये जाने पर पी.सी.पी.एन.डी.टी एक्ट में कार्यवाही संपादित की जाएगी।
देखना यह है कि अवैध रूप से संचालित इस अल्ट्रासाउंड पैथोलॉजी केंद्र पर स्वास्थ्य विभाग कोई वैधानिक कार्रवाई करता है या फिर किसी दबाव में मूकदर्शक बनकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता है।
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