कुम्भ 2019 पर कवि के उद्गार
“गंगा मैया धन्य हो गई”
संगम तट पर बरस रहा है, देवों का आशीष।
देखो जिसको लगा हुआ है, पाने को आशीष।।
माँ गंगा के जयकारे से, गूंज रहा संगम का तट।
लगा रहे सब मिलकर डुबकी, क्या राजा क्या रंक।।
कुंभ का आगाज हो गया, निकला जुलूस विशाल।
संत समाज है मग्न हो रहा, लगा रहा जयकार।।
गंगा के पावन तट पर है, बरसा स्नेह अपार।
कोई अर्पित करे अर्घ ,तो कोई सेवा में मसगूल।।
कोई खोया राम धुनि में, कोई लिए समाधि लीन।
नागा बाबा को तुम देखो, मल रहे हैं भभूत।।
संगम तट की मोहकता का ,कैसे करूँ बखान।
शब्द नहीं हैं उर मे मेरे, जो कर पाऐं गुणगान।।
योगी जी की व्यस्था ने, मन है सबका मोह लिया।
वत्स देता साधुवाद उन्हें, जो किया सफल आयोजन यह।।
ऐसे सपूत को नमन मेरा, जिसने नाम बढाया संगम का।
प्रयाग राज को पहुँचाया है, विश्व पटल के हर कोने में।।
बारम्बार नमन है मेरा, माँ भारती के लाल को।
गंगा मैया भी धन्य हो गई, देख भव्यता संगम की।।
गंगा मैया भी धन्य हो गई, देख भव्यता संगम की।।
<strong>रचनाकार - अशोक राय वत्स</strong>
रैनी, मऊ (उत्तरप्रदेश)
मो. 8619668341
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