रामलीला ! भरत मिलाप से अयोध्या में फैली खुशीहाली

गाजीपुर (उत्तर प्रदेश),21अक्टुबर 2018। अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी के तत्वाधान में एतिहासिक लीला भरत मिलाप का मंचन स्थानीय सकलेनाबाद स्थित भारद्वाज मुनि के आश्रम पर किया गया।
भाव विभोर कर देने वाले मंचन में दर्शाया गया कि श्रीराम लंका में राक्षसों का संहार कर भार्या सीता व अनुज लक्ष्मण संग अयोध्या के लिए चलते हैं, बीच में वे पहला विश्राम भारद्वाज मुनि के आश्रम पर करते हैं। उनके आने की सूचना हनुमान द्वारा मिलती है कि श्रीराम सीता, लक्ष्मण सहित लंकापति महाराज विभीषण, किष्किन्धा नरेश महाराज सुग्रीव, अंगद जामवन्त, नल नील आदि बानरों संग अयोध्या आ रहे हैं तो भरत जी प्रसन्नचित हो जाते हैं। बताते चले कि जिस समय भरत अपने भाई श्रीराम के आदेशानुसार उनकी खड़ाऊ लेकर अयोध्या के राज सिंहासन पर विराजमान कर, अयोध्या का राजकाज सम्भालते है तथा श्रीराम के आने का प्रतीक्षा करते हैं। उनके मन में आता है कि चौदह वर्ष बीतने में जब एक दिन शेष रह जाता है तो उनका मन विचलित होने लगता है। इतने मे हनुमान जी ब्राम्हण का रुप धारण करके अयोध्या जाकर महाराज भरतजी को श्रीराम के आने की सूचना देते हैं तो भरत जी उनसे कहते है कि को तुम तात कहा से आये, मोहि परमप्रिय बचन सुनाये। इतना बात सुनते ही हनुमान जी कहते है कि महाराज मै श्रीराम का भेजा हुआ दूत हॅू। श्रीराम जी राक्षसो को मारकर सीता, अनुज लक्ष्मण व बानरी सेना के साथ अयोध्या के लिए चल दिये हैं और वे भारद्वाज मुनि के आश्रम में विश्राम करते है। जब महाराज भरत को यह पता चला कि भैया राम भारद्वाज मुनि के आश्रम पर आकर विश्राम कर रहे है तो वह इतना बात सुनते ही कहते है कि हे हनुमान कपि तव सकल दुःख बीते, मिले आज मोहि राम पीरिते। इतना कहने के बाद भरत जी हनुमान जी को गले लगा लेते है तथा वे अपने माताओं के पास जाकर श्रीराम के आने की सूचना देते हुए अयोध्यावासियों के साथ भारद्वाज मुनि के आश्रम की ओर प्रस्थान कर देते हैं। थोड़ी दूर जाने के बाद वे शत्रुध्न व गुरु वशिष्ठ के साथ पैदल दौड़ जाते है। श्रीराम ने देखा कि भरत शत्रुघ्न तथा गुरु वशिष्ठ आ रहे हैं तो उनका मन अति प्रसन्न हो जाता है तथा भरतजी अपने बड़े भाई श्रीराम के पैरो पर गिर कर दण्डवत प्रणाम करते है, यह देखकर श्रीराम भाई भरत को गले से लगा लेते है, उधर माताएं अपने भवन में बैठे मन में विचार करती है तथा उनके हृदय में यह प्रसंग आ जाता है कि बैठी सगुन मनावति माता, कब अइहै मेरे बाल कुशलधर, कहहू काग फूरी बाता, दूध भात की दोनी दैहो, सोनन चोच मढैहो। इतना कहते हुए माताएं विचलित हो जाती हैं। श्रीराम के आने के पूर्व महाराज भरत कुशासन पर बैठे रहते हैं जब हनुमान जी आकर उन्हें शुभ समाचार सुनाते हैं तब वे कुशासन को छोड़कर अयोध्या से दौड़ पड़ते है।
भरत जी की शोभा यात्रा स्थानीय मुहल्ला हरिशंकरी से शुरु होकर महाजन टोली, झुन्नूलाल चौराहा, आमघाट, राजकीय महिला महाविद्यालय, राजकीय बालिका इण्टर कालेज, महुआबाग चौक, बाबा पहाड़ खाॅ का पोखरा होते हुए सकेलानाबाद के लिए बैण्डबाजा व भक्तों द्वारा भजन कीर्तन करते हुए लगभग रात्रि बारह बजे सकलेनाबाद पहुचती है। भरत राम का मिलन देखकर हजारों की संख्या में मौजूद श्रद्धालु दर्शकों की आंखों में आसूॅ भर जाते है। श्रद्धालुओं द्वारा जय श्रीराम तथा हर हर महादेव के उद्घघोष के साथ मंचन पूर्ण होता है। इस अवसर पर पुलिस प्रशासन द्वारा जगह-जगह बैरिकेटिंग लगाकर सुरक्षा व्यवस्था की गयी थी।
पात्रो की भूमिका निभा रहे श्रीराम-बऊआ, लक्ष्मण-शिवा, भरत-करन, शत्रुघ्न-ललित, सीता-मोहन, वशिष्ठ -मुन्ना तिवारी, हनुमान-विजय एवं भजन सहयोगी-मस्त राम व राजा भैया अपने कलाकारो सहित लीला के माध्यम से लोगों का मन मोह लिया। इस मौके पर अध्यक्ष दीनानाथ गुप्ता, मंत्री ओमप्रकाश तिवारी (बच्चा), उपमंत्री लवकुमार त्रिवेदी उर्फ बड़े महाराज, मेला प्रबंधक बीरेश राम वर्मा, उपमेला प्रबंधक शिवपूजन तिवारी, कोषाध्यक्ष अभय कुमार, अभिषेक पाण्डेय, प्रदीप कुमार, श्रवण कुमार गुप्ता, विशम्भरनाथ गुप्ता, योगेश वर्मा एडवोकेट, अजय पाठक, रामसिंह यादव, रोहित कुमार अग्रवाल उर्फ विंशू, मीडिया प्रभारी पंड़ित कृष्ण बिहारी त्रिवेदी सहित हजारों दर्शक गण मौजूद रहे।


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