एक विशिष्ट व्यक्तित्व – अटल बिहारी वाजपेयी

नई दिल्ली, 16 अगस्त 2018 । तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे, हरदिल अजीज लोकप्रिय राजनेता, ओजस्वी कवि, सम्मानित समाजसेवी, प्रखर वक्ता और नरम हिंदूत्ववादी के रूप में कई छवियां लपेटे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपनी बिमारी के कारण एम्स के सघन चिकित्सा कक्ष में लाइफ सपोर्ट पर रखा गया है। वे जिन्दगी की जंग लड़ रहे हैं। आज पूरा देश उनकी सलामती के लिए प्रार्थना कर रहा है। भाजपा सहित विभिन्न दलों के देश के जाने माने नेता उनके गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए एम्स पहुंच कर उनके नाजुक स्वास्थ्य की जानकारी ले रहे हैं। विपक्षियों में भी लोकप्रिय पूर्व प्रधानमंत्री बाबासाहेब आप्टे से प्रभावित होकर वर्ष 1939 में आरएसएस से जुड़े थे। उनके व्‍यक्तित्‍व का ही जादू रहा कि अपनी पार्टी के लोगों के साथ-साथ विपक्ष भी उनकी बहुत प्रशंसा और सम्‍मान करता है। उन्‍हें भारत सरकार की ओर से पद्म विभुषण और भारत रत्‍न का सम्‍मान दिया जा चुका है।
अटल बिहारी बाजपेयी जी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में कवि और अध्यापक पिता पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी तथा मां कृष्णा देवी की सातवीं संतान के रुप में हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा बड़नगर, गोरखी के सरस्‍वती शिशु मंदिर से हुई। उन्‍होंने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेजियट स्कूल से इंटरमीडिएट तक और विक्टोरिया कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली। उन्‍होंने एमए डीएवी कॉलेज, कानपुर से किया। वे बचपन से ही वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेते व कविताएं भी लिखते रहे।
पत्रकार के रुप में अटल जी ने राष्ट्रधर्म नामक अखबार में बतौर सह सम्पादक और पांचजन्‍य, वीर अर्जुन व स्‍वेदश जैसे अखबारों में भी संपादन का काम किया। ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान साल 1942 में उन्‍हें उनके बड़े भाई के साथ गिरफ्तार किया गया था। साल 1996 चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। सबसे बड़ी पार्टी के नेता के तौर पर अटल जी को सरकार बनाने का न्योता मिला। अटल सबसे लम्बे समय तक सांसद रहे हैं और जवाहरलाल नेहरू व इंदिरा गांधी के बाद सबसे लम्बे समय तक गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री रहे। वह पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने गठबन्धन सरकार को न केवल स्थायित्व दिया बल्कि सफलता पूर्वक संचालित भी किया। वह पहले विदेश मंत्री थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी में भाषण देकर देश को गौरवान्वित किया था। उन्‍हें भारतीय नृत्‍य और संगीत बेहद पसंद रहे हैं, उन्‍हें प्रकृति से भी बहुत प्‍यार है। उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘मृत्यु या हत्या’, अमर बलिदान, कैदी कविराय की कुण्डलियां, संसद में तीन दशक, मेरी इक्यावन कविताएं आती हैं।


श्री अटल बिहारी वाजपेयी के स्वास्थ्य लाभ की कामना के साथ नमन….

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