डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी पीड़ित को लौटाये 25.44 लाख रुपए

फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर डराया था, साइबर क्राइम थाना गाजीपुर की कार्रवाई


गाजीपुर। डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर साइबर ठगी के मामले में साइबर क्राइम थाना गाजीपुर की टीम ने कार्रवाई करते हुए पीड़ित के खाते में ठगी की रकम में से 25 लाख 44 हजार 800 रुपये वापस कराए हैं। पुलिस के अनुसार साइबर अपराधियों ने फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के माध्यम से पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने का भय दिखाया था।

    नगर के गोरा बाजार पीरनगर निवासी दिनेश सिंह ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोगों ने पुलिस अधिकारी बनकर वीडियो कॉल की। आरोपितों ने उन्हें बताया कि उनके बैंक खाते में मौजूद धनराशि मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी है और गिरफ्तार किए गए एक व्यक्ति के पास उनके नाम का आधार कार्ड मिला है। इसके साथ ही मोबाइल डिटेल में भी उनका नाम सामने आने की बात कहकर उन्हें कार्रवाई और डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया गया।

    पुलिस के अनुसार, भयभीत पीड़ित ने अपनी जीवनभर की बचत और पुत्री की शादी के लिए जमा की गई रकम में से 29.5 लाख रुपये बताए गए खातों में स्थानांतरित कर दिए। साइबर अपराधियों ने पीड़ित को यह भी निर्देश दिया था कि वह घटना की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को न दे। करीब एक माह बाद पुत्री के घर आने पर उसे पिता के भयभीत रहने का कारण पता चला, जिसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई।

शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम थाना गाजीपुर में मुकदमा दर्ज किया गया। साइबर क्राइम थाना प्रभारी रहमतुल्लाह खान और तकनीकी सहायक हेड कांस्टेबल रविकांत जायसवाल समेत टीम ने बैंक खातों और धनराशि के लेनदेन की पड़ताल शुरू की।

   पुलिस के मुताबिक, एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से करीब दो लाख रुपये की धनराशि फ्रीज कराई गई। इसके बाद ठगी की रकम के ट्रांजेक्शन की कड़ियां जोड़ते हुए एक ऐसे बैंक खाते का पता चला, जिसमें करीब 24 लाख 99 हजार 800 रुपये फ्रीज कराए गए। संबंधित बैंक के नोडल अधिकारी और लीगल टीम के साथ समन्वय कर फ्रीज धनराशि पीड़ित के खाते में वापस कराई गई। पुलिस के अनुसार अब तक पीड़ित को कुल 25 लाख 44 हजार 800 रुपये वापस मिल चुके हैं।

पुलिस ने बताया कि मामले की विवेचना जारी है और अब तक सामने आए बैंक खाताधारकों तथा मोबाइल नंबरों के संबंध में विस्तृत जांच की जा रही है। साइबर थाना टीम की कार्रवाई के बाद पीड़ित ने पुलिस के प्रयासों के प्रति आभार जताया।

पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की

साइबर क्राइम थाना पुलिस ने लोगों को आगाह किया है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ कानून में कोई वैधानिक प्रक्रिया नहीं है। पुलिस अथवा कोई अन्य जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को इस तरह धनराशि ट्रांसफर करने के लिए बाध्य नहीं करती। ऐसे कॉल आने पर घबराने के बजाय तत्काल पुलिस से संपर्क करने की सलाह दी गई है।

पुलिस ने कहा कि ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें और cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज कराएं। साइबर अपराध से संबंधित सहायता के लिए गाजीपुर साइबर क्राइम थाना के मोबाइल नंबर 7839864020 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

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