पुस्तक समीक्षा – “कहानियों का आंगन”
गाजीपुर। जिले की समृद्ध धार्मिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक एवं ऐतिहासिक विरासत को अपने आंचल में समेटे तथा मोक्षदायिनी मां गंगा के जल से सिंचित उर्वरा भूमि से उपजा अन्न का सेवन कर यहां के लोगों ने हर क्षेत्र में जिले का नाम रोशन किया है। अपने साहस, वीरता, आध्यात्म और ज्ञान के प्रकाश से समाज को अलौकिक किया है।
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में पतीत पावनी मां गंगा के निकटवर्ती गांव सुहवल के इंजीनियर हरिश्चंद्र राय की सुपुत्री तथा बहुमुखी प्रतिभा की धनी डा नेहा राय ने साहित्य के क्षेत्र में अपनी अमिट पहचान बनाई है। उनकी पुस्तक “कहानियों का आंगन” में पैतृक घर परिवार का जो मर्मस्पर्शी चित्रण किया गया है वह आज की युवा पीढ़ी के लिए एक नसीहत है।
वर्तमान समय में अपना गांव घर छोड़ शहरी चकाचौंध और भौतिक सुख की चाह में दूर दराज के स्थानों पर जा बसे लोगों ने भले ही अपने गांव घर को भुला दिया हो लेकिन जब उन्हें गांव में अपने संयुक्त परिवार और ग्रामीण परिवेश और अपनों के बीच बिताए गए पुराने दिनों का स्मरण होता है तो उनके सामने वह अपनापन दिल के किसी कोने में टीस भर देता है। गांव में संयुक्त जनों के साथ अभावों के बीच रहकर भी जो आत्मीयता और अपनापन दिल को सुकून देता था, आज भौतिक सुख साधनों की उपलब्धता के बावजूद दिल में मौजूद वह अधूरापन बरबस आंखें भर देता है और वह अविस्मरणीय संस्मरण जुबान तक आ जाता है।
सुहवल इंटर कालेज के संस्थापक प्रधानाचार्य व गांधीवादी विचारधारा के प्रबल पोषक स्वर्गीय सुदामा राय जी ने अपने पूरे परिवार को संस्कारित उच्च शिक्षा की ओर अग्रसर किया जिसके फलस्वरूप उनकी पौत्री नेहा ने भी अपने पग बढ़ाये और चिकित्सा व मैनेजमेंट के क्षेत्र को चुनौती के रूप में स्वीकार कर सफलता प्राप्त की लेकिन बचपन से मन में अंकुरित हो रही साहित्य चेतना बढ़ती गयी और उन्होंने अपनी लेखनी और सोच को साहित्यिक मोड़ दे दिया।
आंगन पुस्तक पढ़ते हुए जब मन पुरानी यादों में डुबकी लगाने लगता है तो उस समय की सुखद यादें आंखों की पलकों से आंसू छलक जाते हैं। यह पुस्तक पठनीय और संग्रहणीय है जो युवाओं को अपनी वास्तविकता का बोध कराते हुए उन्हें पारिवारिक रिश्तों की अहमियत और अपनापन का बोध कराते में सक्षम होगी।
डा.ए.के.राय
राष्ट्रीय सलाहकार – जर्नलिस्ट काउन्सिल ऑफ इंडिया
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