होमियोपैथी के विस्तार में डॉ राजपूत के विचार प्रासंगिक
गाजीपुर। राजकीय गाजीपुर होमियोपैथिक मेडिकल कॉलेज गाज़ीपुर के प्राचार्य प्रो. डा राजेंद्र सिंह राजपूत ने अपने विशिष्ट ज्ञान, सोच और शोध से होमियोपैथी के विस्तार को नयी दिशा देने का कार्य किया है, उससे निःसंदेह होमियोपैथी का विकास होगा।
विज्ञान भवन, नई दिल्ली में भारत सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उनके विशेष व्याख्यान के लिए उन्हें देश के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सकों, अनुसंधानकर्ताओं तथा होमियोपैथी प्रेमियों ने उन्हें बधाई दी है।
बताते चलें कि केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद, राष्ट्रीय होमियोपैथी संस्थान और राष्ट्रीय होमियोपैथी आयोग द्वारा विज्ञान भवन, नई दिल्ली में ‘विश्व होमियोपैथी दिवस’ के अवसर पर दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें प्रदेश से एक मात्र चिकित्सक के रूप में जनपद के राजकीय होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर डॉक्टर राजेंद्र सिंह राजपूत को विशेष व्याख्यान के लिए आमंत्रित किया जाना सिर्फ जनपद ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात रही।

उल्लेखनीय है कि पूरे प्रदेश से प्रोफेसर राजपूत अकेले प्राचार्य हैं, जिन्हें राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग और राष्ट्रीय केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद ने “जन स्वास्थ्य की समस्याएं और उनका होम्योपैथिक निदान” (सस्टेनेबल हैल्थ एंड होम्योपैथी) विषय पर एक्सपर्ट के रूप में पैनल में शामिल किया है। बताते चलें कि मूल रूप से कम्युनिटी मेडिसिन विषय के आचार्य डॉ राजेंद्र राजपूत वैज्ञानिक अनुसंधान समिति के अध्यक्ष भी हैं, जिनके नेतृत्व में रीजनल इंस्टीट्यूट आफ होम्योपैथी में वैज्ञानिक अनुसंधान किये जा रहे हैं। डॉ बी आर अंबेडकर यूनिवर्सिटी आगरा के डीन, होम्योपैथी साइंस और इंस्टीट्यूशनल एथिकल कमेटी, पी जी आई के अध्यक्ष डॉ राजपूत ने अपने उदबोधन में सस्टेनेबल हेल्थ गोल और होम्योपैथिक विज्ञान की उपयोगिता विषय पर विस्तार से अपनी बेबाक बात रखी, जिसे पूरे देश से शामिल होमियोपैथी के लोगों द्वारा सहर्ष स्वीकार किया गया। अपने आलेख व शोध के माध्यम से उन्होंने विश्व में होने वाली कई संभावित बीमारियों की रोकथाम, उनके पूर्व निदान और होम्योपैथी में उसके उपचार की संभावना पर विस्तार से जानकारी दी। देश के प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सकों, चिकित्सा शास्त्र के विद्वानों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा आयुष मंत्रालय के अधिकारियों ने डा राजपूत के विचारों को आत्मसात करते हुए उनके अनुरूप कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई।

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