नहीं रहीं सुरों की मलिका आशा भोसले
“अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं’
भारतीय सिने जगत का सदाबहार गीत… अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं ………… की गायिका और भारतीय सिने जगत की मशहूर शख्शियत आशा भोसले ने 92 वर्ष की अवस्था में आखिरकार रविवार 12 अप्रैल को अपने नश्वर शरीर को त्याग दिया। उन्होंने 8 सितम्बर 1933 को दीनानाथ मंगेशकर के पुत्री और लता मंगेशकर की बहन के रूप में जन्म लिया था। हिंदी, भोजपुरी, बंगाली, मराठी, अंग्रेजी व रुसी सहित विभिन्न भाषाओं में उनके गाए हुए लगभग 15000 गाने आज भी लोगों को आकर्षित करते हैं। इन्होंने शास्त्रीय संगीत के साथ ही साथ गजल और पॉप संगीत क्षेत्र में भी नाम कमाया। भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी उनके गानों की धूम रही। विश्व के विभिन्न देशों में उन्हें अनेकों बार प्रतिष्ठा परक सम्मानों से सम्मानित किया गया था। भारतीय सिनेमा में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें सन 2000 में “दादा साहेब फाल्के अवार्ड” से सम्मानित किया गया था। भारत की राष्टपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल द्वारा 5 मई 2008 को आशा भोसले को “पद्मविभूषण” सम्मान से सम्मानित किया था।
अस्वस्थता की अवस्था में एक दिन पूर्व ही शनिवार को उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां रविवार को उनकी सांसें थम गयीं।
भारतीय फिल्म संगीत जगत की बहुमुखी प्रतिभा की धनी पद्मविभूषण सम्मान से विभूषित आशा भोसले के जाने से वह स्थान हमेशा के लिए खाली हो गया।
आज उनका जाना एक महान गायिका का निधन ही नहीं, बल्कि भारतीय संगीत के उस स्वर्णिम युग की अंतिम प्रतिनिधि का खालीपन है, जिसने सुरों को सिर्फ सुना नहीं, जिया भी था। पिता के निधन के बाद बहन लता मंगेशकर की छाया में कठिन दौर से गुजर कर अपनी अलग पहचान बनायी। काफी संघर्ष के बाद आखिरकार उन्होंने वह मुकाम हासिल कर लिया जहां पहुंचना हर किसी के वश की बात नहीं रही। हर किस्म के गानों को आवाज देते हुए वह उसी किरदार में खो जाती थीं। आर. डी. बर्मन के साथ उनकी जोड़ी ने संगीत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
अब वे सशरीर हमारे बीच नहीं हैं लेकिन कलाकार कभी समाप्त नहीं होते बल्कि उनकी कला हमारे बीच उनका जीवन्त एहसास कराती रहती है। इनके गाये गाने लोगों को बरबस आकर्षित करते रहेंगे।
Views: 51









