श्रद्धा एक प्राकृतिक, दैवीय, सहज सद्गुण, सत्संग से जागृत होता है विवेक
गाजीपुर। श्री गंगा आश्रम में ४८वें मानवता अभ्युदय महायज्ञ के सातवां दिन श्रीरामचरितमानस के पारायण और वैदिक हवन यज्ञ के साथ संपन्न हुआ।
संध्याकालीन सत्संग ज्ञानयज्ञ में व्याख्यानों की श्रृंखला में केशव जी ने कहा कि, सत्संग से विवेक मिलता है, इसलिए परमात्मा की कृपा मानकर सत्संग में मन लगाना चाहिए। राजेंद्र जी ने कहा कि परमात्मा अहंकार ही खाते हैं। माता द्रौपदी अपने चीरहरण के समय सभी शक्तिशाली लोगों के समक्ष प्रार्थना कर रही थीं लेकिन वहां उपस्थित सम्राट से लेकर उनके अपने शक्तिशाली पतियों में से किसी ने अन्याय के विरुद्ध उनकी रक्षा नहीं की। जैसे ही उनका अपने बल और संबंधों का अहंकार समाप्त हुआ और उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की, वह सुरक्षित हो गईं। इसलिए भगवान को पहले ही याद करके अनपेक्ष हो जाना चाहिए। वहीं गोपाल सिंह ने कहा कि रास्ते के कांटे पत्थर या अवरोध हटा देने से २१ दिनों तक नकारात्मक शक्तियों का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। कहा कि अनैतिक काम से जमा पैसा कभी नहीं लेना चाहिए क्यों उससे कभी शांति नहीं मिलती है।
आश्रम के सर्वराहकार, मानव धर्म प्रसार समाजसेवी संस्था के अध्यक्ष और बाबा गंगारामदास उत्तर माध्यमिक बालिका विद्यालय के प्रबंधक महंत भोला बाबा ने कहा कि मन चंगा तो कठौती में गंगा, और उन्होंने इससे संबंधित कथा सुनाकर संत रविदास की महिमा गाई। युवा व्यास माधव कृष्ण ने कहा कि श्रद्धा एक प्राकृतिक, दैवीय, सहज सद्गुण है। श्रद्धावान ही ज्ञान प्राप्त कर सकता है और तनावमुक्त रह सकता है। औपनिषदिक चिंतन मनुष्य को गुरु के एक एक वक्त में श्रद्धावान होने के लिए कहता है क्योंकि एक सूत्र को जीवन बना लेने वाले शिष्य का जीवन निष्कपट और सरल हो जाता है।
कार्यक्रम सम्पन्न होने के बाद रात में सभी आगंतुकों को भोजन प्रसाद देकर विदा किया गया।
Views: 18








