जगन्नाथ सिंह पुरस्कार से सम्मानित किए गए वरिष्ठ साहित्यकार राम बहादुर राय
छपरा(बिहार)। अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के अमनौर (सारण) में सम्पन्न 28 वें अधिवेशन में वरिष्ठ साहित्यकार राम बहादुर राय को प्रतिष्ठित जगन्नाथ सिंह पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया।
उल्लेखनीय है कि राम बहादुर राय ने सबसे पहले हिन्दी में लिखना आरंभ किया तथा अपनी लेखनी को पुस्तक के रूप में ढ़ाला। उनकी अन्य रचनाओं में जीवन के विविध रंग, अनकही संवेदनाए,आदमी के कई रंग व धरती के परिंदे आदि प्रमुख पुस्तकें हैं। कहा जाता है कि ख्यातिलब्ध साहित्यकार डाॅ विवेकी राय का ननिहाल इन्हीं के घर है और उनका जन्म भी 19 नवम्बर सन 1924 में मामा बसाऊ राय के घर हुआ था। डाॅ साहब भोजपुरी के भी बड़े साहित्यकार रहे तो राम बहादुर राय का ध्यान भी भोजपुरी की तरफ बरबस ही आकृष्ट होने लगा और भोजपुरी लिखना शुरू कर दिया। सबसे पहले भोजपुरी के मान्यता के सम्बन्ध में सोचकर भोजपुरी के लिए पहली ओर अपनी पांचवी पुस्तक भोजपुरी के मान्यता देंई ए सरकार लिखा। इस पुस्तक में सारी कविताएं सिर्फ और सिर्फ भोजपुरी की मान्यता की मांग के सम्बन्ध में ही है। उसके बाद एक और भोजपुरी की पुस्तक अब गँवुओ में शहर आ गइल लिखा। इस पुस्तक में भी पूरा गाँव से सम्बंधित कविता है। फिर एक और पुस्तक आखिर मौन कब तक कविता के रूप में आई। इनकी साहित्यिक सेवा के कारण ही इन्हें
विद्यावाचस्पति और फिर विद्यासागर सम्मान से सम्मानित किया गया। वहीं साझा काव्य और गद्य संकलन लगभग तीस से अधिक ही लिखा है और पत्र पत्रिकाओं में कहानी, कविता, निबंध छपते रहे है। वहीं हमार गाँव भोजपुरी काव्य संग्रह के रूप में प्रकाशित हुई। इसी क्रम में भोजपुरी संस्मरण के रूप में “गाँव के थाती” प्रकाशित हुई।
मूलत: ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले राम बहादुर राय की लेखनी में अक्सर गाँव, गरीब, किसान, मजदूर और इनकी व्यथा देखने को मिलती है। भोजपुरी के प्रति विशेष लगाव और गाँव को गाँव की संस्कृति और संस्कार को बचाने की कोशिश लेखनी के माध्यम से करते रहते हैं।
विदित हो कि राम बहादुर राय अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन की कार्यसमिति के राष्ट्रीय सदस्य तो हैं साथ ही साथ भोजपुरी साहित्य विकास मंच कोलकाता के राष्ट्रीय संगठन पदाधिकारी एवं जिलाध्यक्ष भी हैं।
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