संविधान सभा के लोगों के सम्मिलित प्रयास का फल है भारत का संविधान
“संविधान सभाध्यक्ष के रूप में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का योगदान” विषयक संगोष्ठी में वक्ताओं ने व्यक्त किए विचार
गाजीपुर। भारतवर्ष के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद जयंती समारोह नगर के चित्रगुप्त मंदिर के सभागार में बुधवार को ससमारोह सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इससे पूर्व, संस्था के मंत्री के नेतृत्व में नगर के पीरनगर स्थित पूर्व राष्ट्रपति बाबू राजेंद्र प्रसाद की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के कृतित्व और व्यक्तित्व पर चर्चा करते हुए उनके आदर्शों से सीख लेकर राष्ट्र हित में कार्य करने का आग्रह किया गया।
“संविधान सभाध्यक्ष के रूप में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का योगदान” विषयक संगोष्ठी में वक्ताओं ने अपने उद्गार व्यक्त किया। मुख्य वक्ता स्वामी सहजानंद पी जी कॉलेज के प्रो. डॉ. प्रमोद कुमार ‘अनंग’ ने कहा कि देश के संविधान निर्माण में अनेकों महान राजनीतिज्ञों एवं विद्वानों ने अहम भूमिका निभाई। भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की स्थाई अध्यक्षता में कुल 299 सदस्यों की संविधान सभा बनी थी जिसने भारतीय संविधान के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश को लोकतंत्र के रूप में स्थापित करने में सफलता मिली। भारतीय लोकतंत्र का यह संविधान निर्माण किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि संविधान सभा के सभी सदस्यों के सामूहिक सहयोग का प्रतिफल है। कहा गया कि डॉ. राजेन्द्र बाबू केवल संविधान सभा की स्थायी अध्यक्षता ही नहीं की, बल्कि संविधान निर्मात्री प्रमुख समितियों में से तीन प्रमुख समितियों की भी अध्यक्षता की।
इस अवसर पर चित्रगुप्त वंशीय संस्था के मंत्री अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि संविधान की प्रतिलिपि मुख्य प्रारूपकार सुरेंद्रनाथ मुखर्जी ने तैयार की, जबकि प्रारंभिक और तकनीकी मार्गदर्शन संवैधानिक सलाहकार कानून के सर्वकालिक विद्वान बी. एन. राव ने किया। इसलिए किसी एक व्यक्ति को इसका श्रेय कदापि नहीं दिया जा सकता। सभा के उपाध्यक्ष नीरज श्रीवास्तव अजय ने स्वागत उद्बोधन करते हुए कहा कि तीन दिसंबर अंतर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस के रूप में मनाते हैं। इसी दिन भारत को विकलांगता से मुक्ति दिलाने के लिए महान स्वतंत्रता सेनानी और स्वतंत्रतापूर्व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्वअध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद की जयंती पूरे गर्व और सम्मान के साथ हम मनाते हैं, जिनके नेतृत्व में भारत के महान संविधान का निर्माण हुआ। इस अवसर पर. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्था अध्यक्ष आनंद शंकर श्रीवास्तव ने कहा कि प्रथम राष्ट्रपति होने के साथ-साथ डॉ राजेंद्र प्रसाद दो बार पूर्ण कालिक राष्ट्रपति रहे, उन्होंने भारत के संवैधानिक परंपराओं के निर्माण में न केवल अहम भूमिका का निर्वहन किया, बल्कि स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांत के प्रति जीवन भर प्रतिबद्ध रहकर देश की सेवा की।
इस अवसर पर वक्ताओं में मुख्य रूप से संजीव अरुण कुमार, क्षितिज श्रीवास्तव, अभय श्रीवास्तव, अफसर हुसैन, मनीष पांडेय, सुनील श्रीवास्तव, कमलेश श्रीवास्तव, मुनीन्द्र श्रीवास्तव, अरविंद,रवि श्रीवास्तव, विभोर श्रीवास्तव, अंजनी श्रीवास्तव,डा. शरद वर्मा, दिनेश्वर दयाल, राजेश श्रीवास्तव सहित काफी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित रहे।
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