समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं साहित्यिकार दिलीप चौहान 

मातृप्रेम में घर में स्थापित की माता की प्रतिमा 


गाजीपुर। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थान साहित्य उन्नयन संघ के संस्थापकाध्यक्ष और पेशे से शिक्षक दिलीप कुमार चौहान ने अपनी ममतामयी मां की प्रतिमा घर के आंगन में स्थापित कर समाज को आइना दिखाया है। मां की प्रतिमा की नित्य पूजा-अर्चना करते हुए समाज के ऐसे लोगों को संदेश देने का काम किया है जो निजी स्वार्थ में अपने माता-पिता को घर से बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं। वे मूल रूप से बलिया जिले के नगरा थाना क्षेत्र के सराया गुलबराय के निवासी हैं। 

      जिले में शिक्षक के पद पर कार्यरत दिलीप कुमार चौहान लेखक, कवि एवं समाजसेवी हैं।

उन्होंने अपनी माँ की स्मृति में समाज के एक लाख गरीब एवं जरूरत बच्चों में किताब, कॉपी, कलम, भोजन एवं अन्य सामग्री के निःशुल्क वितरण का संकल्प लिया है जिसके तहत अब तक दस हजार बच्चों में उक्त सामग्री का वितरण कर चुके हैं। साहित्यकार के रूप में काव्य – संकलन चाँद में भी दाग है, सुलगती हुई चिंगारी एवं  सम्राट पृथ्वीराज चौहान की जीवन गाथा काफी लोकप्रिय है। उनकी रचनाएं वीणा, आजकल जैसी अनेकों राष्ट्रीय पत्रिकाओं में भी प्रकाशित होती रही हैं। हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेजी भाषा में भी लेखन क्षमता रखने वाले दिलीप चौहान की अंग्रेजी रचनाएँ वर्डप्रेस जैसे अंतराष्ट्रीय पटल पर पढ़ी जाती हैं। साहित्य के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए उन्हें विक्रमशीला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार द्वारा डॉक्टरेट की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया है। 

Views: 31

Advertisements

Leave a Reply