वंदे मातरम् गीत राष्ट्रीय चेतना और राष्ट्र गौरव का प्रतीक

गाजीपुर‌। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय  द्वारा रचित “वंदे मातरम्” गीत देशभक्ति, जनजागरण और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। यह प्रेरणादायक गीत भारतीय स्वाधीनता चेतना का आधार बनी।


       इस गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जनपद के विभिन्न थानों व शिक्षण संस्थानों पर भावनात्मक समारोह आयोजित कर इसके प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। “वंदे मातरम्” गीत के सामूहिक गान से संपूर्ण वातावरण राष्ट्रीयता और राष्ट्र प्रेम की भावना से ओत-प्रोत रहा। कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस बल व देशवासियों में देशभक्ति, एकता और राष्ट्रीय गौरव की भावना को सशक्त करना रहा। 

       इस अवसर पर पीजी कालेज मलिकपूरा में       प्राचार्य प्रो. दिवाकर सिंह के निर्देशन में गरिमामयी एवं भावनापूर्ण समारोह में वक्ताओं ने  “वंदे मातरम्” भारतीय राष्ट्रीय भावना का उज्ज्वल प्रतीक है। इसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जन-जन में देशभक्ति, साहस और आत्मगौरव की ज्योति प्रज्वलित की। यह गीत केवल काव्य नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति अटूट श्रद्धा और भारतीय संस्कृति की अखंड एकता का अमर घोष है। “वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा का स्वर है, जो प्रत्येक नागरिक को राष्ट्रभक्ति, सेवा और सद्भाव के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा प्रदान करता है। कहा गया कि “वंदे मातरम्” का प्रथम प्रकाशन वर्ष 1875 में हुआ था तथा 1950 में संविधान सभा ने इसेएवं सामुहिक गान कर राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता प्रदान की। 

       वक्ताओं ने उपस्थित जन समुदाय से इस गीत को आत्मसात कर राष्ट्रीय हित में कार्य करने हेतु प्रेरित किया गया। इसी प्रकार हाईटेक कालेज आफ मैनेजमेंट एण्ड ई टेक्नोलॉजी हंसराजपुर में भी समारोह आयोजित कर लोगों में राष्ट्र प्रेम की भावना जागृत की गयी। इस अवसर पर निदेशक प्रकाश गुप्ता, चन्द्र शेखर यादव, सिराजुद्दीन अंसारी, सुरेश यादव, बृजेश कुमार सहित कौशल विकास मिशन से जूड़े युवा मौजूद रहे।

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