उन्हें हिन्दी से प्यार है, क्योंकि आज हिन्दी का बाज़ार है
कहीं मस्जिद कहीं शिवाला है, फिर भी होता नहीं उजाला है
‘परिचालन दर्पण’ पुस्तक का विमोचन सम्पन्न
गाजीपुर। क्षेत्रीय रेल प्रशिक्षण संस्थान में राजभाषा पखवाड़ा के उपलक्ष्य में कवि-सम्मेलन का आयोजन सम्पन्न हुआ।
साहित्य चेतना समाज के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि सुबोध कुमार सिंह उप मुख्य सतर्कता अधिकारी पूर्व मध्य रेलवे, प्रशिक्षण संस्थान के प्रधानाचार्य जयप्रकाश सिंह, कवि सम्मेलन के अध्यक्ष कामेश्वर द्विवेदी द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण-पुष्पार्चन व दीप प्रज्वलन से हुआ। संस्थान के प्रधानाचार्य जयप्रकाश सिंह ने उपस्थित कवियों को अंगवस्त्र एवं उपहार प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही प्रशिक्षण संस्थान के पुरुष छात्रावास का नामकरण ‘रामधारी सिंह दिनकर छात्रावास’ एवं महिला छात्रावास का नामकरण ‘सुभद्रा कुमारी चौहान छात्रावास’ करने की घोषणा की। तदुपरान्त मुख्य अनुदेशक/प्रशिक्षण अरुण कुमार पाल द्वारा लिखित ‘परिचालन दर्पण’ पुस्तक का विमोचन हुआ।
मुख्य अतिथि सुबोध कुमार सिंह ने अपने सारगर्भित वक्तव्य में इस पुस्तक के महत्त्व को रेखांकित करते हुए हिन्दी के उत्थान में ऐसे ही साहित्यिक कार्यक्रमों की सततता एवं अनिवार्यता पर जोर दिया।
कावि-सम्मेलन का प्रारम्भ महाकवि कामेश्वर द्विवेदी की वाणी वन्दना से हुआ। काव्यपाठ के क्रम में नवगीतकार डाॅ.अक्षय पाण्डेय ने हिन्दी पर केन्द्रित अपना नवगीत “हिन्दी हमारी आन की ,ईमान की भाषा , हिन्दी हमारे देश के सम्मान की भाषा” प्रस्तुत की तो डॉ.सन्तोष कुमार तिवारी ने हिन्दी पर केन्द्रित कविता “उन्हें हिन्दी से प्यार है/क्योंकि आज हिन्दी का बाज़ार है।” सुना कर वाहवाही बटोरी। भोजपुरी एवं हिन्दी के गीतकार हरिशंकर पाण्डेय ने अपना पिता शीर्षक गीत “हाय कैसी जमाने की रफ्तार है/ऑंकता,भाॅंपता,मापता है पिता।” सुनाकर खूब तालियाॅं बटोरी। युवा ग़ज़ल-गो गोपाल गौरव ने “कहीं मस्जिद कहीं शिवाला है/फिर भी होता नहीं उजाला है।” प्रस्तुत कर खूब प्रशंसा पायी। नगर के वरिष्ठ शायर कुमार नागेश ने “तुम आज मुझे मनमीत लिखो/मैं तुझ पे कोई गीत लिखूॅं तो शायर हन्टर ग़ाज़ीपुरी ने अपने हास्य-व्यंग्य मुक्तकों से खूब हॅंसाया। बतौर बानगी-“अब इतने निचले भी स्तर पे आ नहीं सकते/तुम्हें ढकेल के हम आगे जा नहीं सकते”। वीर रसावतार दिनेशचन्द्र शर्मा ने अपनी कविता “यह सच है कि आतंकवाद का ताण्डव कम नहीं/फिर भी मादरे वतन की क़सम/देश की एकता को विखण्डित नहीं होने देंगे” सुनाकर श्रोताओं में ओज का संचार किया। अध्यक्षीय काव्यपाठ करते हुए कवि कामेश्वर द्विवेदी ने अपनी छान्दस कविता “दूध घूम-घूम बेचा जाता आज घर-घर/और दारू बिकता है एक ठाॅंव बैठ कर।” प्रस्तुत कर तालियां बटोरी। साहित्य चेतना समाज के संस्थापक एवं वरिष्ठ व्यंग्यकार अमरनाथ तिवारी ‘अमर’, प्रशिक्षण संस्थान के अनुदेशक सुनील सिंह,युवा व्यंग्य-कवि आशुतोष श्रीवास्तव एवं युवा कवि मनोज यादव ‘बेफिक्र’ ने अपने सरस काव्यपाठ से संगोष्ठी की गरिमा को उत्कर्ष प्रदान कर श्रोताओं को रससिक्त कर दिया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी, राघवेन्द्र ओझा, शाश्वत पाण्डेय, नन्द किशोर सिंह,अभय कुमार सिंह एवं सैकड़ों की संख्या में प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे। कवि-सम्मेलन का संचालन सुपरिचित नवगीतकार डाॅ.अक्षय पाण्डेय ने किया। अन्त में प्रशिक्षण संस्थान के प्रधानाचार्य जयप्रकाश सिंह ने समस्त आगन्तुक कवियों एवं श्रोताओं के प्रति आभार ज्ञापित किय।
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