छात्रनेताओं ने विरोध प्रदर्शन कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ निकाली भड़ास

स्व. सियाराम को न्याय दिलाने हेतु राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन 


पुलिस ने कई छात्र नेताओं को किया हाऊस अरेस्ट

गाजीपुर। नोनहरा थाने पर प्रदर्शन के दौरान पुलिसिया लाठी चार्ज और फिर गम्भीर रूप से घायल भाजपा कार्यकर्ता सियाराम उपाध्याय की मौत के बाद पुलिस के खिलाफ उपजा आक्रोश थम नहीं रहा है। अब तक महामहिम राष्ट्रपति, राज्यपाल व  मुख्य मंत्री उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को ज्ञापन देकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार करने की मांग की गयी है। 

        इसी क्रम में कचहरी क्षेत्र के सरजू पाण्डेय पार्क में रविवार की शाम छात्रनेताओं ने पुलिसिया अत्याचार से मृत हुए स्व सियाराम उपाध्याय की आत्मा की शान्ति के लिए  श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर न्याय हेतु आंदोलन की रणनीति बनाई थी। श्रद्धांजलि बैठक में यह तय किया गया था कि मंगलवार  16 सितम्बर को सुबह 10 बजे छात्रनेता एवं लोग सरयू पांडेय पार्क से जुलूस निकालकर जिलाधिकारी कार्यालय तक जायेंगे और ज्ञापन सौंपेंगे।

       उसी पूर्व नियोजित कार्यक्रमानुसार मंगलवार को छात्र नेता सरयू पाण्डेय पार्क में जमा होने लगे जबकि कई छात्र नेताओं को पुलिस ने हाऊस अरेस्ट कर दिया‌ । इसके बावजूद सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र नेता गण सरयू पाण्डेय पार्क में पहुचकर सभा किये।  सभा में वक्ताओं ने नोनहरा थाने में सियाराम उपाध्याय सहित अन्य लोगों को पीटे जाने की कड़ी निन्दा की। प्रदर्शनकारियों ने “स्व. सियाराम को न्याय दो”, “हत्यारे पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार करो” और “पुलिस अधीक्षक के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। सभा के बाद प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के प्रतिनिधि मुख्य राजस्व अधिकारी (सीआरओ) आयुष चौधरी को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि स्व. सियाराम उपाध्याय को बेरहमी से पीटने वाले पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी की जाए। सियाराम के भाई को सरकारी नौकरी और उनके वृद्ध माता-पिता को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए, ताकि उन्हें जीविकोपार्जन में कठिनाई न हो।प्रदर्शन में डॉ. शम्मी सिंह, शशांक उपाध्याय, अभिषेक राय, शिवम उपाध्याय, दिवंशु पांडेय, सतीश उपाध्याय सहित कई लोग शामिल रहे। दूसरी ओर, छात्र नेताओं का आरोप रहा कि पुलिस इस आंदोलन को रोकने के लिए सुबह ही कई छात्र नेताओं को घरों में नजरबंद कर दिया था। पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय और पूर्व महामंत्री सुधांशु तिवारी को हाउस अरेस्ट कर सोशल मीडिया पर कार्यक्रम स्थगित होने की झूठी सूचना प्रसारित करने के लिए मजबूर किया गया। इसके बावजूद कुछ छात्रनेता और नागरिक जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचने में सफल रहे और उन्होंने विरोध दर्ज कराते हुए ज्ञापन सौंपा। 

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