गो आश्रय केन्द्र के गोबर के ढेर में दफनाए मिले गो वंशों के शव
मुख्यमंत्री के निर्देशों की धज्जियां उड़ाते मिले आश्रय केन्द्र के संचालक और जिम्मेदार अधिकारी
गाजीपुर। ब्लॉक सदर के छावनी लाइन क्षेत्र के सरैया के गौ आश्रय केंद्र पर वहां मृत गो वंशों को गोबर के ढेर के नीचे दफनाने के मामले के प्रकाश में आने पर गांव में हड़कम्प मच गया। वहां की स्थिति देखकर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वपूर्ण योजनाओं में एक गो आश्रय केंद्र की ऐसी दुर्दशा दखकर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए।
मीडिया द्वारा सोमवार 21 जुलाई को खबर उजागर करते ही विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों में खलबली मच गई। गो आश्रय केन्द्र से जुड़े लोगों ने मीडिया को दबाव में लेने के लिए उन्हीं पर पैसा मांगने का आरोप लगाने लगे। पहले से सतर्क मीडियाकर्मियों द्वारा वहां पहुंचते ही इससे वहां का लाइव प्रसारण किया जा रहा था। मामले की लाइव विडियो चलने की जानकारी होते ही इस काण्ड पर पर्दा डालने वाले बैक फुट पर आ गये। बताया गया कि वहां पहुंचे पशु चिकित्सक ने वहां काम करने वालों का भरपूर बचाव करने की कोशिश की और मृत पशुओं को वहां दफनाने से इंकार किया लेकिन गोबर के नीचे दफनाये गये पशुओं को देखकर उनकी बोलती बंद हो गई। वहीं उसी गांव की बहू को वहां का सेक्रेटरी नियुक्त करने पर प्रशासन पर भी सवालिया निशान लगा। घटना की हकीकत देखकर वह स्वयं तो मौके से दूर रही लेकिन उसका पति वहां आकर दबंगयी दिखाकर मीडिया को ही घेरने में लगा रहा लेकिन जब उसे लाइव प्रसारण की जानकारी हुई वह दुम दबाकर मौके से भाग निकला।
मजेदार बात यह रही कि जिले के प्रशासनिक विकास भवन से मात्र ड़ेढ़ किमी की दूरी पर स्थित इस गो आश्रय केन्द्र के संचालकों व सम्बन्धित कर्मचारियों को किसी का खौफ नहीं रहा और सारी मर्यादा ताक पर रख इस अनैतिक काम में जूटे रहे। इतना ही नहीं वल्कि वहां से कुछ ही दूरी पर प्राथमिक विद्यालय भी मौजूद है जहां ग्रामीणों के बच्चे पढ़ने आते हैं।
मृत गो वंशों को गोबर में दफनाकर उनकी खाद बनाने की जानकारी जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक को दी गयी है। इस अमानवीय कार्य में लिप्त अधिकारियों व कर्मचारियों पर शासन प्रशासन क्या कार्रवाई करता है, इस पर लोगों की निगाहें लगी हुई हैं।
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