चेतावनी बिन्दू को पार कर उफान पर गंगा
ठौर ठिकाना बदलने में लगे तटवर्ती इलाकों के लोग
गाज़ीपुर। वर्षा और भयंकर गर्मी ने जूझ रहे आमजन व किसानों जहां परेशान हैं, वहीं गंगा नदी के बढ़ते जल स्तर ने तटवर्ती इलाकों के लोगों की धड़कन बढ़ती जा रही है। किसान जहां अपनी धान की सुखती नर्सरी को देखकर चिन्तित हैं तो नदी किनारे स्थित लोग अपनी रिहायशी स्थिति को लेकर नये बसेरा की तलाश में लग गये हैं।
खेती के लिए आषाढ़ माह की बारिश खेतों को नया जीवन देती है जो मामूली बरसात के साथ बीत गयी। इस वर्ष भयंकर गर्मी और सूखे की मार झेल रहे लोगों को भले ही अब तक गर्मी से राहत नहीं मिली है लेकिन गंगा नदी का जलस्तर अब बढ़ने लगा है। सावन के माह में निस्तेज पड़े खेतों में धूल उड़ रही है और प्राणी जन उमस और गर्मी से परेशान हैं। अवर्षण और गर्मी के बावजूद गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। नदी किनारे बसेरा बनाए लोगों व समीपवर्ती बस्तियों के निवासियों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। पिछले हफ्ते से लगातार बढ़ाव की ओर अग्रसर गंगा नदी मंगलवार 15 जुलाई को बढ़ते हुए चेतावनी बिन्दू पार कर अपराह्न पांच बजे जलस्तर 61.660 मीटर मीटर जा पहुंचा और जलस्तर 3 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि जिले में गंगा का जलस्तर के चेतावनी बिंदु की सीमा 61.550 मीटर निर्धारित है। जबकि जल स्तर का खतरा बिन्दु 63.105 मीटर तथा बाढ़ का उच्च स्तर 65.220 मीटर निर्धारित है। बताते चलें कि वर्ष 2019 में बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.530 मीटर, वर्ष 2021 बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.680 मीटर, वर्ष 2022 बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.390 मीटर तथा वर्ष 2023 में बाढ़ का उच्च जलस्तर 61.700 मीटर रहा है।
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