पूर्व विधायक, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, स्वतंत्रता सेनानी की मनी पुण्यतिथि
स्व. सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह के विचार आज भी प्रासंगिक
गाजीपुर। सिद्धेश्वर प्रसाद जनसेवा संस्थान, सिद्धेश्वर नगर, लंका के सभागार में पूर्व विधायक, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह की ४५वीं पुण्य तिथि ससमारोह मनाईं गई। इस अवसर पर स्व. सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। इस अवसर पर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने आज के नेताओं से उनके आदर्शों पर चलने की आवश्यकता पर बल दिया।”वर्तमान लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की भूमिका” विषयक गोष्ठी में वक्ताओं ने चर्चा की। गोष्ठी के मुख्य वक्ता माधव कृष्ण ने कहा कि आदर्श देश वही है जहां आमजन की समस्याओं को सुलझाया जा सके। लोक एवं तंत्र यद्यपि एक दूसरे के विरोधी हैं जिसे हमने जबरदस्ती जोड़ रखा है, तथापि आज भी लोकतंत्र की मजबूती तथा लोकमत बनाने के लिए जमीनी लोगों की जरूरत है जो गहराई तक सोच सकें।
विशिष्ट वक्ता श्रीकांत पाण्डेय ने कहा कि संविधान में विश्वसनीयता को गांधी जी ने जनांदोलन का स्वरूप प्रदान किया किंतु स्वतंत्रता से पूर्व के लोगों के प्रयास को कम नहीं आंका जा सकता। लोकतंत्र अभी मरा नहीं है उसे हमें जागृत बनाए रखने की जरूरत है।
अध्यक्षता करते हुए अमेरिका सिंह यादव ने कहा कि लोकतंत्र में सफल विपक्ष की भूमिका आवश्यक है। आज नेताओं की नैतिकता एवं चरित्र में गिरावट आई है, ऐसे में श्रेष्ठ समाज के निर्माण के लिए सिद्धेश्वर बाबू जैसे नैतिक व्यक्ति को याद किया जाएगा।
इस अवसर पर अखिलेश राय, संतोष कुमार राय, प्रेम शंकर राय, राम नगीना पांडे, जितेंद्र नाथ राय, अरुण कुमार सिंह, मोती प्रधान, बटुक नारायण मिश्र, अच्युतानंद राय रामनाथ ठाकुर, अनिल अमिताभ दुबे एवं डॉ रणविजय सिंह ने गोष्ठी को संबोधित किया। उक्त अवसर पर डॉ दिनेश कुमार सिंह, अजय कुमार तिवारी, रघुवंश नारायण सिंह, बृजेंद्र राय, सुरेश राय, चंद्र कुमार सिंह, प्रमोद कुमार राय, निशीथ सिंह, अशोक राय, हृदय नारायण सिंह यादव, डॉ प्रहलाद राय, अक्षयबर विंद, केदारनाथ यादव, सच्चिदानंद सिंह, सुशील कुमार सिंह, मुन्ना यादव, कृपा शंकर राय, राम मोहन पांडे, संजय राय, इरफान अली, रामजी प्रसाद गुप्त रामविलास यादव कुणाल शिवम राय आदि उपस्थित रहे। गोष्ठी के संचालक कवि दिनेश चंद्र शर्मा ने “लहरों के थपेरों को किनारों से पूछो, गमों के दौर को कलमकारों से पूछो”कविता के माध्यम से श्रद्धांजलि व्यक्त किया। कार्यक्रम के समापन पर संस्थान के संरक्षक अखिलेश्वर प्रसाद सिंह ने गोष्ठी में उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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