दूसरों को सुख प्रदान करने वाले को ईश्वर करते हैं सुखी 

गाजीपुर। मानव धर्म प्रसार व्याख्यानमाला का आयोजन जंगली बाबा महाविद्यालय नसीरपुर, हंसराजपुर में सम्पन्न हुआ। श्री गंगा आश्रम के तत्वावधान में   आश्रम के सर्वराहकार भोला बाबा और आजमगढ़ आश्रम के महंत गजराज बाबा भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ ईश्वर वंदना, ध्वजारोहण तथा बाबा गंगारामदास के चित्र के समक्ष पुष्पार्चन, दीपार्चन और माल्यार्पण से हुआ।                                                 मुख्य वक्ता माधव कृष्ण ने कठोपनिषद के प्रसंग को उठाया और कहा कि, नचिकेता ने यमराज से आत्मज्ञान का वरदान मांगा। यमराज ने उन्हें अपार भौतिक सुख सम्पत्ति, अखंड साम्राज्य  मांगने को कहा, लेकिन नचिकेता ने उन सबको  क्षणिक बताकर आत्मज्ञान की मांग की। इसलिए यमराज ने उनके वैराग्य की प्रशंसा करते हुए उन्हें कठोपनिषद का ज्ञान दिया।  श्रीमद्भगवद्गीता कहती है कि परम सत्य केवल अनन्य भक्ति से मिलता है। प्रवचन, मेधा और श्रवण केवल परम सत्य का संकेत देते हैं, परन्तु वहां तक जाने के लिए तो स्वयं चलना ही पड़ेगा। जैसे पोथियां पढ़ने से मार्ग का पता तो चलता है लेकिन उस मार्ग पर निष्ठापूर्वक और सावधानी से चलना साधक का उत्तरदायित्व है। पूज्य परमहंस बाबा गंगारामदास ने आत्मज्ञान के लिए जो मार्ग निर्दिष्ट किया उसमें इसी भाव की प्रधानता है, मनुष्यता। उन्होंने कहा कि परोपकारी धर्मात्मा बिना साधन तप के भी परमाप्ता को प्राप्त कर लेता है। जो दूसरों को सुख देता है परमात्मा उसे ही सुख देते हैं। उनके सातों महावाक्यों का एकमात्र उद्देश्य है, हमें उस मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना जहां सभी धर्मों का सार मनुष्यता हमारे प्रत्येक मन, वचन, कर्म में उतर आए। 


     कार्यक्रम में इंद्रदेव सिंह, राजेंद्र सिंह, अजय, वीरेंद्र, साहब यादव इत्यादि भक्त जन उपस्थित थे। सभा का समापन गुरुदेव की आरती और गांव वालों के साथ सामूहिक भोजन से हुआ। आभार ज्ञापन प्रबंधक भानु याद ने किया।

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