नई पीढ़ी को गीत और गीतकारों को पढ़ने की जरूरत
गाजीपुर। जिले के वरिष्ठ चर्चित साहित्यकार एवं कवि प्रोफ़ेसर शिखा तिवारी और माधव कृष्ण को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भोजपुरी अध्ययन केंद्र द्वारा शोध संवाद में एकल व्याख्यान और एकल काव्य पाठ कर साहित्यकारों का मान बढ़ाया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हिंदी विभाग के प्रोफेसर वशिष्ठ अनूप ने कहा कि, हिंदी पट्टी की नई पीढ़ी को गीत और गीतकारों को पढ़ने की आवश्यकता है ताकि यह भ्रम दूर हो सके कि गीतों में आधुनिक युग की जटिलता को कहने की शक्ति नहीं है। उसके प्रमाण के रूप में उन्होंने निराला और अन्य सशक्त गीतकारों का उद्धरण दिया।
उल्लेखनीय है कि भोजपुरी अध्ययन केंद्र भोजपुरी भाषा के परिष्कार और नवाचार पर काम कर रहा है। मुख्य वक्ता प्रोफेसर शिखा तिवारी ने अपने विस्तृत व्याख्यान में कहा कि, भोजपुरी जनपद की विशेषताएं नवगीत के कथ्य के बेहद करीब है। उसमें नवगीत की भांति ही लोक संपृक्ति और जन संसक्ति का भाव है; शोषण के विरुद्ध विद्रोह और जनपक्षधरता है; लोक भाषा, मुहावरों, शिल्प, राग, पर्व इत्यादि का प्रयोग है। उन्होंने गाजीपुर से डॉ उमाशंकर तिवारी, गोरखपुर से देवेंद्र आर्य, मऊ से डॉ कमलेश राय और वाराणसी से ओम धीरज के अतिरिक्त अनूप अशेष और अन्य नवगीतकारों के नवगीतों के माध्यम से भोजपुरी जनपद की विशिष्टताओं का उल्लेख किया। उन्होंने शोधार्थियों को नवगीत के क्षेत्र में अधिक शोध करने के लिए प्रेरित किया क्योंकि इस तरफ काम कम हुए हैं। एकल काव्य पाठ में साहित्यकार माधव कृष्ण ने अपनी भोजपुरी कविता देखली एक अचंभा और हिन्दी कविता कुछ तो है इस पार नदी के पढ़ी। “सब कहते हैं सपना है पर नींद नहीं खुलती है/स्वप्नलोक में ही रहने दो सांसों की विनती है/तट पर मल्लाहों मछली का खेल वही है शायद/अविरल धारा में जाकर आने की एक कवायद/रह लेने दो और मुझे संग घरनी घर लुगदी के।
कार्यक्रम का समापन समन्वयक प्रोफेसर प्रभाकर सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन और साहित्यकारों के सम्मान के साथ संपन्न हुआ।
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