अंतःकरण में ज्ञान की अग्नि प्रज्ज्वलित होने से होता है इंद्रियों की विषय वासना का नाश  

गाज़ीपुर। श्री गंगा आश्रम द्वारा आयोजित मानव धर्म प्रसार जनजागरण कार्यक्रम जंगीपुर क्षेत्र के सहादतपुर में सम्पन्न हुआ। 


        कार्यक्रम का शुभारंभ आश्रम के सर्वराहकार भोला बाबा द्वारा मानव धर्म के ध्वजारोहण, प्रार्थना व दीपार्चन और पुष्पार्चन से हुआ। इस अवसर पर परमहंस बाबा गंगारामदास के शिष्य व कानपुर आश्रम के महंत गोरख बाबा, आजमगढ़ के महंत गजराज बाबा भी उपस्थित रहे।

       कार्यक्रम में व्याख्यान देते हुए माधव कृष्ण ने कहा कि, कबीर दास ने अध्यात्म के गूढ़ तत्त्वों का निरूपण अपनी उलटबांसियों में किया है। एक उलटबांसी में वह कहते हैं कि समुद्र में आग लग गई, नदियां जलकर कोयला हो गईं, कबीर जाग रहा है और देख रहा है कि मछली वृक्ष पर चढ़ गई। यहां समुद्र अंतःकरण है, आग ज्ञान है, नदियां इंद्रियां है, मछली कुंडलिनी है और वृक्ष सहस्त्रार चक्र है। अर्थात अंतःकरण में ज्ञान की अग्नि प्रज्ज्वलित होते ही इंद्रियों की विषय वासना समाप्त हो जाती है, जीवात्मा जाग जाती है और देखने लगती है, और कुंडलिनी सहस्त्रार पर चढ़ जाती है। समाधि घटित हो जाता है।

यह गूढ़ आध्यात्मिक भाषा वैदिक भाषा की तरह है। वहां भी ज्ञान को अग्नि कहा गया है। ज्ञान का एकमात्र अर्थ है, सभी प्राणियों में और सर्वत्र ब्रह्मदर्शन करना, द्वैत का समाप्त हो जाना। ऐसी वृत्ति के प्रज्ज्वलित होते ही, इंद्रियां जो विषय वासना को लाकर हमारे अंदर ठूंसती रहती हैं, शांत हो जाती हैं। क्योंकि संभोग करने या किसी और से कुछ लेने के लिए दो का होना जरूरी है। जब सर्वत्र ब्रह्म ही दिखने लगा तो फिर कौन किससे क्या लेगा? इस ज्ञान से छल, कपट, कामना, क्रोध, लोभ सब समाप्त हो जाते हैं। इस अवस्था को ही जागरण कहते हैं। अन्यथा हर मनुष्य एक गहरी नींद में सोया हुआ हैं कामनाओं के वशीभूत होकर कठपुतली की तरह सत्ता, धन, सौंदर्य और कीर्ति के पीछे भाग रहा है। एकमात्र ईश्वर को सर्वत्र देखना ही वास्तविक देखना है, तभी समाज से जातिवाद और सांप्रदायिकता समूल समाप्त हो सकते हैं। अन्यथा मोह ऐसी वृत्ति है कि आँखें रहते हुए भी मनुष्य गांधारी की तरह आंखों पर पट्टी बांधकर अंधा बना हुआ है। इस स्थिति के घटित होना ही समाधि है और जीते जी मनुष्य दिव्य हो जाता है।

    कार्यक्रम का समापन गुरु की आरती और प्रसाद वितरण से हुआ। कार्यक्रम में अजय, वीरेंद्र, अनिरुद्ध, उपेन्द्र, राजिंदर सहित काफी संख्या में गणमान्य लोग व भक्तजन उपस्थित रहे।

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