चौदह वर्ष से चल रहे श्रीरामचरित मानस महायज्ञ के पूर्ण होने पर चल रहा अनुष्ठान 

रामचरित मानस सिखाता है जीने की कला – महामंडलेश्वर स्वामी भवानी नन्दन यति जी महाराज 


गाजीपुर। सैदपुर क्षेत्र के भीमा देवी नवदुर्गा मंदिर भीमापार संगत पर चार अप्रैल 2011 से चल रहे श्रीरामचरित मानस महायज्ञ के 14 वर्ष पूर्ण होने के उपरांत वहां सप्त दिवसीय अनुष्ठान का आयोजन वैदिक आचार्यों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच सम्पन्न कराया जा रहा है। इस विशेष अनुष्ठान की पूर्णाहुति 11 जून को वृहद भंडारा के साथ किया जायेगा।

    अनुष्ठान के चौथे दिन कार्यक्रम में सिद्धपीठ हथियाराम मठ के पीठाधिपति महामंडलेश्वर स्वामी श्री भवानी नन्दन यति जी महाराज ने वहां उपस्थित भक्तों व श्रद्धालुओं को आशीर्वचन दिया। उन्होंने कर्म के साथ धर्म के प्रति आस्थावान रहकर सद्मार्ग पर चलने की सीख दी। महाराज श्री ने कहा कि श्रीरामचरित मानस भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि है, जो आस्था से जुड़ा हुआ है। इसमें भाई, परिवार, गुरु, शिष्य, माता-पिता, मित्र, प्रजा के साथ हर जीव से आदर्श व्यवहार की प्रेरणा मिलती है। रामचरितमानस की हर चौपाई और मंत्र लोगों को जीवन में सकारात्मक सोच की सीख देती है। कुछ चौपाईयां तो ऐसी भी हैं, जिनसे कितना भी बड़ा संकट क्यों न आ जाए, उससे तुरंत छुटकारा मिल जाता है। जीवन में बड़ा बदलाव होता है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस न केवल धार्मिक ग्रंथ है, बल्कि यह जीवन जीने की कला भी सिखाता है। उन्होंने सनातन संस्कृति के संरक्षण हेतु ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर बल देते हुए युवाओं को धर्म और संस्कृति से जुड़ने की प्रेरणा दी। औ

       इससे पूर्व मंदिर के पुजारी आचार्य राजकुमार पांडेय व्यास के निर्देश पर आयोजन समिति के सदस्यों ने सम्मानित अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। 

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