‘पुनर्जागरण के लिए महापुरुषों का चिंतन व आंदोलन’ नामक पुस्तक का हुआ लोकार्पण 

गाजीपुर। पूर्व सांसद जगदीश कुशवाहा द्वारा लिखित ‘पुनर्जागरण के लिए महापुरुषों का चिंतन व आंदोलन’ नामक पुस्तक का लोकार्पण उनके विद्यालय एम.जे.आर.पी. पब्लिक स्कूल में सम्पन्न हुआ। 


        समारोह की मुख्य अतिथि वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर की पूर्व कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि हमारा देश और समाज अपने दायित्व से विमुख होकर सुसुप्तावस्था में चला गया है। इस सोए हुए समाज और देश को जगाने के लिए लेखक ने देश के महापुरुषों के अमृत संदेशों के माध्यम से जगाने का जो कार्य किया है वह एक सराहनीय प्रयास है। इस पुस्तक का संदेश घर-घर,जन-जन तक जाना चाहिए ताकि देश में पुनर्जागरण आ सके और स्वस्थ समाज, परिवार तथा व्यक्ति का पुनर्निर्माण हो सके। 

     वरिष्ठ साहित्यकार हीरालाल मिश्र ‘मधुकर’ (संपादक- ‘कविताम्बरा’) ने मुक्तकों के माध्यम से अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि रचनाकार में साहित्यबोध प्रारंभिक काल से ही विद्यमान था जो अनुकूल वातावरण पाकर इस 86 वर्ष की उम्र में प्रस्फुटित हुआ है। महापुरुषों के प्रेरणादाई अमृत संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने और उसके गूढ़ तत्वों को तार्किक ढंग से लोगों को बताने की आवश्यकता है जिससे कि जनचेतना जागृत हो सके। साहित्यकार गिरीश पाण्डेय ने विमोचित पुस्तक में उद्धृत वेद-मंत्र के सस्वर वाचन के साथ अपना विचार रखते हुए कहा कि समन्वय और समता का संदेश हमारे पुरुषों ने जो दिया है उसे पुनर्स्थापित करने के लिए रचनाकार अनुप्राणित है। प्रखर विचारक माधवकृष्ण ने कहा कि आज हर व्यक्ति अथवा समुदाय किसी एक महापुरुष को आदर्श मानकर उसके घरौंदे तक ही अपने को सीमित कर लिया है। जो दीवार की तरह हमें अलग कर दिया है। इस पुस्तक में उन अनेक महापुरुषों के विचारों को महत्व दिया गया है जो हमारे लिए प्रेरणादाई है। यह पुस्तक हमें समन्वय का संदेश देती है, जो स्वस्थ और सकारात्मक समाज के निर्माण के लिए नितांत आवश्यक है। डा ऋचा राय ने आधार वक्तव्य देते हुए पुस्तक का संक्षिप्त परिचय कराते हुए कहा कि यह पुस्तक देश और समाज के समग्र उत्थान के लिए पठनीय है। पुस्तक के लेखक जगदीश कुशवाहा ने अपने मनोभावों को व्यक्त करते हुए इस पुस्तक को लिखने की मनोवृति कैसे पैदा हुई उसका उल्लेख करते हुए अपने जीवन-संघर्ष का संक्षिप्त परिचय कराया जो श्रोताओं को भावविभोर कर देने वाला था। इस अवसर पर ड बालेश्वर विक्रम, डॉ सुभाष चन्द्र,कामेश्वर द्विवेदी, डाॅ. रश्मि शाक्या,  डाॅ. ललिता कुशवाहा, रामधारी यादव, गोपाल यादव, रामराज कुशवाहा, केशरी यादव, अलगू कुशवाहा, जयप्रकाश कुशवाहा,मार्कण्डेय यादव, नरेंद्र, अनिल, विनोद, प्रभुनाथ, हरेंद्र कुशवाहा, संजीव अग्रहरी, कृष्णा नन्द तिवारी, राजनारायन कुशवाहा, दीपक कुमार एवं अनेक साहित्यकार व शिक्षक गण उपस्थित रहे। आभार ज्ञापन विद्यालय के प्रबन्धक राजेश कुशवाहा तथा कार्यक्रम का संचालन डॉ. गजाधर शर्मा ‘गंगेश’ ने किया।

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