ख़बर आ रही पूरब में कलकत्ते से/ ज़हर झर रहा मधुमक्खी के छत्ते से”

कवि गोष्ठी संग मना हिन्दी दिवस


गाजीपुर। शहर के शास्त्रीनगर स्थित डाॅ.अम्बिका प्रसाद पाण्डेय के आवास पर विचार-गोष्ठी एवं काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ रचनाकार अनन्तदेव पाण्डेय एवं संचालन डाॅ.अक्षय पाण्डेय ने किया। गोष्ठी का शुभारंभ कवि कामेश्वर द्विवेदी की वाणी-वंदना “स्नेह मिले अति प्रमुदित हों जन से हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में डाॅ.विनय कुमार दूबे विभागाध्यक्ष-हिन्दी,पी.जी.काॅलेज,गाजीपुर ने कहा कि “वर्तमान सन्दर्भ में हिंदी की दशा चिंताजनक है। हिंदी भाषा का प्रयोग कम होता जा रहा है, खासकर युवा पीढ़ी में। अंग्रेजी का प्रभाव बढ़ने से हिंदी की पवित्रता भी खतरे में है। हिंदी के शब्दों का अंग्रेजी में अनुवाद किया जा रहा है, जिससे हिंदी की अपनी पहचान ख़त्म हो रही है। इसके अलावा, हिंदी की शिक्षा की कमी और हिंदी साहित्य की उपेक्षा भी हिंदी की दशा को ख़राब कर रही है। हमें हिंदी को बचाने और संरक्षित करने के लिए कदम उठाने होंगे।” इसी क्रम में डाॅ.श्रीकांत पाण्डेय ने कहा कि “हिन्दी की समावेशी प्रकृति एक अनोखी विशेषता है, जो इसे विश्व की एक महान भाषा बनाती है। हिन्दी ने विभिन्न क्षेत्रों और संस्कृतियों से शब्द और विचार ग्रहण किए हैं, जिससे यह एक समृद्ध भाषा बन गई है। हिन्दी में संस्कृत, अरबी, फारसी, तुर्की और अंग्रेजी जैसी भाषाओं के शब्द शामिल हैं, जो इसकी समावेशी प्रकृति को दर्शाते हैं। यह भाषा विभिन्न वर्गों और समुदायों को एक साथ जोड़ती है और राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देती है।”डाॅ.अम्बिका प्रसाद पाण्डेय ने हिन्दी के भविष्य के प्रति सकारात्मक पहलुओं पर विचार करते हुए कहा कि “हिन्दी का भविष्य उज्ज्वल है। डिजिटल युग में हिन्दी का प्रयोग बढ़ रहा है। हिन्दी साहित्य और पत्रकारिता का निरन्तर विकास हो रहा है। हिन्दी धीरे-धीरे ही सही चिकित्सा, तकनीकी एवं व्यापार की भाषा बन रही है।हिन्दी भाषा को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल रही है। हिन्दी का भविष्य सुरक्षित है।

       इसी के साथ कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवियों ने काव्यपाठ कर कार्यक्रम को ऊंचाईयों पर पहुंचाया। वरिष्ठ साहित्यकार व कवि माधव कृष्ण ने समसामयिक घटना-सन्दर्भित अपनी कविता “ख़बर आ रही पूरब में कलकत्ते से/ज़हर झर रहा मधुमक्खी के छत्ते से” प्रस्तुत कर प्रशंसित रहे। हास्य-व्यंग्यकार विजय कुमार मधुरेश ने “लिखा है न क़िस्मत में अगर फूल हमारी/काॅंटों में रहकर वक़्त गुज़ारा करेंगे हम” सुनाकर वाहवाही लूटी। युवा नवगीतकार डाॅ.अक्षय पाण्डेय ने हिन्दी को केंद्र में रखते हुए अपना नवगीत “हिन्दी हमारे आन की ईमान की भाषा/हिन्दी हमारे देश के सम्मान की भाषा” सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वरिष्ठ कवि धर्मदेव यादव ने “दीन-दुखियों को अपना सखा मानकर/दें ख़ुशी,उनको उर से लगाते चलें” सुनाकर प्रशंसा अर्जित की। नगर के वरिष्ठ ग़ज़ल-गो नागेश मिश्र ने “कुछ दिल के,कुछ दुनिया के नज़ारे होते हैं/शेर सिर्फ़ अल्फ़ाज़ नहीं इशारे होते हैं” इस शेर पर खूब वाहवाही लूटी। इसी क्रम में भोजपुरी के वरिष्ठ कवि अनन्तदेव पाण्डेय अनन्त,महाकाव्यकार कामेश्वर द्विवेदी, दिनेशचन्द्र शर्मा, अमरनाथ तिवारी अमर, हरिशंकर पाण्डेय, गोपाल गौरव एवं आशुतोष श्रीवास्तव के काव्य-पाठ से श्रोता आनन्द-विभोर रहे।                                         इस सरस काव्यगोष्ठी में श्रोता के रूप में प्रमुख रूप से संस्था के संगठन सचिव

प्रभाकर त्रिपाठी, जयप्रकाश दूबे,राघवेन्द्र ओझा, रवीन्द्र नाथ सिंह, डॉ.विजय कुमार मिश्र, राजीव कुमार मिश्र, डॉ.महेश चन्द्र लाल, राजेश्वर तिवारी, सतीश पाठक, वर्तिका, तारा,आराध्या, अन्वि, अभ्युदय आदि उपस्थित रहे। अन्त में अध्यक्षीय उद्बोधनोपरान्त संस्था के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

    

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