वायरल फीवर से निपटने हेतु आयुष विभाग ने कसी कमर

आयुर्वेदिक औषधियां रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर


गाजीपुर। कोविड के साथ ही वर्तमान समय में मौसम के बदलाव के कारण मौसमी बीमारियाँ बढ़ रही हैं। इस मौसम में जुकाम, खांसी, बुखार आम बीमारी हैं। इससे घबराने की जरूरत नहीं हैं,क्योंकि आयुर्वेद में ऐसी औषधि के प्रयोग का जिक्र है जो वायरल और संक्रामक बीमारियों के लिए रामबाण हैं। ये औषधियां रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक होती हैं। 
      प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शेरपुर के आयुष विभाग के डॉ अमित कुमार गुप्ता ने बताया कि मौजूदा समय में वायरल बुखार तेजी से फैल रहा है, जिसको लेकर लगातार मरीजों की संख्या स्वास्थ्य केंद्र पर बढ़ रही है।  शनिवार को 32 मरीजों का इलाज किया गया, जिसमें से करीब 15 मरीज वायरल बुखार के थे। सभी मरीजों को आयुर्वेदिक औषधियां नि:शुल्क उपलब्ध करायी गयीं । इन सभी औषधियों को शहद के साथ दिन में दो बार खाने से बुखार में कमी आएगी। उन्होंने बताया कि वायरल बुखार से पीड़ित व्यक्ति अपने खान-पान पर विशेष ध्यान दें। उबला हुआ पानी पिएं, चावल और दही का सेवन न करें। इसके अलावा ठंडा खाने और पीने से बचें। सामान्य मरीज की नाड़ी देखकर दवा दी जाती है और मरीज की हालत गंभीर हो तो उसको खून की जांच कराने का परामर्श दिया जाता है। इसके बाद प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार ही दवा दी जाती है।
     जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ आनंद विद्यार्थी ने बताया कि अमृतबल्ली, गुडूची, गिलोय आदि नामों से पुकारी जाने वाली आयुर्वेदिक औषधि संक्रामक बीमारियों को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखती है। उन्होंने बताया कि गिलोय का काढ़ा शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है। गिलोय का इस्तेमाल सैकड़ों सालों से बुखार को ठीक करने के लिए किया जाता है। गिलोय का काढ़ा कई दिन तक लगातार सेवन करने से पुराने से पुराने ज्वर में भी राहत मिलती है।

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