लोक भूषण सम्मान से सम्मानित डाॅ. राजेश्वरी शांडिल्य के निधन पर शोक सभा

गाजीपुर। देश की ख्यातिलब्ध साहित्यकार तथा जनपद की महत्वपूर्ण साहित्यिक विभूति, उ.प्र. सरकार के ‘लोक भूषण सम्मान’ से सम्मानित डाॅ. राजेश्वरी शांडिल्य के निधन पर ‘साहित्य चेतना समाज’ की शोक-सभा संस्था के रायगंज स्थित केन्द्रीय कार्यालय पर सम्पन्न हुई।
  शोक सभा में वक्ताओं ने उनके अवदान को रेखांकित करते हुए कहा कि डाॅ. राजेश्वरी शांडिल्य के निधन से साहित्य-जगत के साथ ही अपना जनपद भी शोक-संतप्त है। डॉ.शांडिल्य सुहवल की बेटी और आरीपुर की वधू थीं। वे देश के प्रख्यात भाषाविद डाॅ. भोलानाथ तिवारी की अनुज-वधू थीं। इन्होंने हिन्दी एवं भोजपुरी की पचासों चर्चित पुस्तकें लिखी हैं जिनमें सदानीरा, चिन्तन का चिन्तन, उत्तिष्ठ जाग्रत भारतवर्ष, भारतीय पर्व एवं त्यौहार, भोजपुरी गीतों का मर्म तथा अन्य निबन्ध, बाल ज्ञान विज्ञान, गूलर के फूल, लोक-संस्कृति एगो झांकी, भोजपुरी लोकगीतन में गीत तत्व आदि विशेष चर्चित हैं। इनके सम्पादन में भोजपुरी और हिन्दी की द्विभाषी पत्रिका’भोजपुरी लोक’ का अनवरत प्रकाशन होता रहा।’साहित्य चेतना समाज’ ने डाॅ. शांडिल्य जैसी साहित्यिक विभूति को सन् 2006 में ‘गाजीपुर गौरव सम्मान’ से सम्मानित करते हुए खुद को गौरवान्वित महसूस किया था। इनके निधन से गाजीपुर ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण देश की अपूरणीय साहित्यिक क्षति हुई है।
सभा में प्रमुख रूप से अमरनाथ तिवारी ‘अमर’, प्रभाकर त्रिपाठी, डाॅ. रविननदन वर्मा, प्रभाकर त्रिपाठी, डाॅ. अक्षय पाण्डेय, कामेश्वर द्विवेदी, दिग्विजय उपाध्याय, संजीव गुप्त, विन्ध्याचल यादव, राजीव मिश्र, शशिकान्त राय आदि उपस्थित रहे।
                   


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