रामनवमी पर ………….” रघुनंदन की आभा में”

” रघुनंदन की आभा में”


चैत्र मास नवमी तिथि आई मातु कौशल्या थी अकुलाई,
हर्षित थे सब लोग लुगाई जन्म लिए थे जब रघुराई।
दास दासियां सब व्याकुल थे प्रसव वेदना से वाकिफ थे,
दशरथ घर गूॅंजी किलकारी पुष्पित हो गए महल अटारी।

सुन शुभ समाचार सब आए सभी देव मिल मंगल गाए,
हर घर आंगन बजी बधाई सुर नर मुनि सब खुशी मनाए।
दसों दिशाएं जगमग हो गई अवधपुरी आए रघुराई,
देख अलौकिक छवि पुत्र की कौशल्या मन मन हर्षाए।

नदियां सभी समाहित हो गई सरयू की जलधारा में,
दिग दिगंत तक सभी खो गए रघुनंदन की आभा में।
सूर्य वंश भी धन्य हो गया कौशल्या सुत को पाकर,
धाम बन गई अवधपुरी बही श्री राम की धारा में।

कवि अशोक राय वत्स
रैनी मऊ उत्तरप्रदेश, 8619668341

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