प्रवासी कामगारों को 15 दिन के भीतर पैतृक स्थान भेजने का दिया निर्देश

नयी दिल्ली, 09 जून 2020। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केन्द्र और राज्यों को निर्देश दिया कि कोविड-19 की वजह से पलायन करने वाले कामगारों को 15 दिन के भीतर उनके पैतृक स्थान पहुंचाया जाये और इनके पुनर्वास के लिये इनकी कौशल क्षमता का आकलन करने के बाद रोजगार की योजनाएं तैयार की जायें।
न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने लॉकडाउन के दौरान पलायन कर रहे कामगारों की दयनीय स्थिति का स्वत: संज्ञान लिये गये मामले में वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये अपने फैसले में विस्तृत निर्देश दिये।
पीठ ने केन्द्र को निर्देश दिया कि इन श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिये अतिरिक्त रेलगाड़ियों की मांग किये जाने पर 24 घंटे के भीतर राज्यों को ट्रेनें उपलब्ध करायी जायें।
इसके साथ ही न्यायालय ने लॉकडाउन के दौरान नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में इन कामगारों के खिलाफ आपदा प्रबंधन कानून के तहत दर्ज शिकायतें वापस लेने पर विचार करने का भी संबंधित प्राधिकारियों को निर्देश दिया।
पीठ ने प्राधिकारियों को उन कामगारों की पहचान करने का निर्देश दिया जो अपने पैतृक स्थान लौटना चाहते हैं और उन्हें भेजने सहित सारी कवायद मंगलवार से 15 दिन के भीतर पूरी की जाये। पीठ ने इस मामले को जुलाई में सुनवाई के लिये सूचीबद्ध करते हुये कहा कि इन कामगारों के कल्याण और रोजगार की योजनाओं का समुचित प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए।
बताते चलें कि शीर्ष अदालत ने कोरोना वायरस महामारी के कारण देश में लागू लॉगडाउन के दौरान अपने अपने पैतृक स्थानों की ओर जा रहे कामगारों की दुर्दशा का स्वत: संज्ञान लिया था। न्यायालय ने मामले में पांच जून को केन्द्र और राज्य सरकारों का पक्ष सुनने के बाद फैसले के लिए नौ जून की तारीख निर्धारित की थी।


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