पालघर घटना ! अखाड़ा परिषद समेत संतों ने की कड़ी भर्त्सना, उठायी त्वरित कार्यवाही की मांग
गाजीपुर, 21अप्रैल 2020। महाराष्ट्र में गत 16 अप्रैल गुरुवार की रात को पालघर जिले के कासा क्षेत्र में भीड़ द्वारा जूना अखाड़ा के दो संतों सहित तीन लोगों की पीट-पीट कर दुस्साहसिक हत्या किये जाने पर पूरे देश में आक्रोश व्याप्त है।

उत्तर प्रदेश के संत महात्माओं ने इस घटना की कड़ी भर्त्सना करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से यथाशीघ्र त्वरित न्यायायिक प्रक्रिया अपना कर दोषियों को शीघ्र कड़ी से कड़ी सजा सजा दिलाने हेतु तत्पर होना चाहिये।

बताते चलें कि मृतक संत कल्पवृक्ष गिरी महाराज भदोही जिले के वेदपुर गांव के निवासी थे। उनका बचपन का नाम कृष्ण तिवारी था और वे चिंतामणि तिवारी के चौथे पुत्र थे। सन्यास और सनातन धर्म के प्रति उनकी बचपन से ही आस्था थी। वे प्राइमरी स्कूल में पढ़ने गए थे जहां से दस वर्ष की उम्र में ही वह वहां से लापता हो गए थे। तीस वर्षों के बाद एक संत के रूप में उनका पता चला था। ड्राइवर के साथ दूसरे मृत संत सुशील गिरी उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के चांदा थाना क्षेत्र के प्रतापपुर कमैचा (चांदा बाजार) के मूल निवासी थे। उनका वास्तविक नाम शिव नारायण दूबे था। जूना अखाड़े से जुड़े संतों की हत्या से सुल्तानपुर व भदोही सहित पूरे प्रदेश के लोगों में आक्रोश रहा। वे लोग अपने गुरु भाई संत राम गिरि जी महाराज के यहां सूरत जा रहे थे। हाईवे से गुजरते समय तलासारी गांव के पास अचानक भीड़ ने गाड़ी रुकवाकर, स् पुलिस के सामने ही बुरी तरह मारपीट कर मौत के घाट उतार दिया।
आनलाइन वार्ता के क्रम में प्रसिद्ध सिद्धपीठ हथियाराम मठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनन्दन यति जी महाराज ने व्यथित स्वर में कहाकि महाराष्ट्र हिन्दू प्रधान व संत महापुरुषों की स्थली रहा है। साधु सन्तों की धरती पर निहत्थे सन्तों को घेरकर पर भीड़ द्वारा पीटकर हत्या किया जाना,उनकी विदीर्ण मानसिकता को दर्शाता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि निहत्थे संतो पर हमला कर उनकी हत्या करना रावणराज की याद दिला रहा है। उसी तरह आज साधुता पर हमला हुआ और मौजूद पुलिस मूकदर्शक बनी रही। महाराष्ट्र की इस घटना ने धर्माचार्यों व धर्मगुरुओं को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने कहा कि नागा संत मांद में सोए हुए शेर के समान हैं और सरकार को साधु महात्माओं की शक्ति को कमतर नहीं आंकना चाहिए। यदि देश के नागा संत जागकर विद्रोह पर आ जाएंगे तो देश को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि देश के 13 अखाड़ों के साधु-संतों से मोर्चा खोल दिया तो फिर उनको सम्भालना सरकार को भारी पड़ सकता है।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी महामंडलेश्वर महाराजश्री ने केंद्र सरकार व महाराष्ट्र सरकार से न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार पहल करते हुए शीघ्रातिशीघ्र दोषियों को कठोर दंड से दंडित करने की मांग की है।
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