घंटा, घड़ियाल, शंख, थाली व ताली बजाने से बढ़ती है क्षेत्र की सकारात्मक ऊर्जा

वाराणसी,22 मार्च 2020।घंटा, घड़ियाल, शंख, थाली व ताली बजाने से क्षेत्र की सकारात्मक ऊर्जा (पाजीटीविटी) बढ़ती है तथा नकारात्मक उर्जा (निगेटिविटी)का ह्रास होता है। यह अकाट्य सत्य है कि कांसा धातु व पीतल धातु से उत्पन्न सूक्ष्म ध्वनि तरंगे इलेक्ट्रो मैग्नेटिक ऊर्जा पैदा करती हैं जिनका मान गीगा हर्ट्ज व टेरा हर्ट्ज तक पहुंचता है। जब हम किसी कांसे के बर्तन को निर्धारित चोट से कम व ज्यादा जोर से बजाते हैं तो ध्वनि तरंगे कम से अधिकतम मोड में प्रवेश करती हैं, जिससे एक इलेक्ट्रो मेगेनेटिक ऊर्जा क्षेत्र पैदा होता हैं, जिस क्षेत्र के सम्पर्क में आने से वायरस या विषाणुओं में कम्पन होने लगता है। कोरोना वायरस की बाहरी सतह (वाह्य भित्ति) बहुत ही कमजोर है जिससे इसे द्विपक्षीय ध्रुवीय क्षेत्र यानी डाईपोल में आते ही वायरस का न्यूक्लियस टूटने लगता है तथा ये निष्क्रियता की तरफ बढ़ जाती है।
ज्ञात रहे कि 5 बजे के सायें समय में हमारे सनातन में पूजन व ध्वनि गर्जन घण्टा गर्जन, व शंखनाद किया जाता था, मृत्यु के समय प्राणी के घर पर शंखनाद किया जाता है, जिसका सीधा- सीधा अर्थ जीवाणुओं का निष्क्रिय करना रहा है।
माइक्रोवेव थ्रेसहोल्ड एनर्जी कम्पन्न जो कांसे के बर्तन को कम से तीव्रता की तरफ बजाते हुए पैदा की जाती है, इसी प्रकार शंख ध्वनि भी तीव्र थ्रेसहोल्ड पर बजा कर उच्च माइक्रोवेव तरंगे पैदा करती हैं। यह कम्पन करके वायरस के आउटर सेल यानी बाहरी कवर को माइक्रो वेव इलेक्ट्रो मेगेनेटिक किरणों से थरथर्राहट से तोड़ देती है।
आज शाम 5 बजे सभी के द्वारा मिलकर अपने अपने घरों से विभिन्न प्रकार की जो ध्वनि गर्जना उत्पन्न की गयी है,इससे जहां सकारात्मक ऊर्जा बढ़ी है,मन प्रफुल्लित हुआ है,वहीं वातावरण में भी जीवाणु व वायरस का नाश भी हुआ है।


(पाजीटीविटी) बढ़ती है तथा नकारात्मक उर्जा (निगेटिविटी)का ह्रास होता है। यह अकाट्य सत्य है कि कांसा धातु व पीतल धातु से उत्पन्न सूक्ष्म ध्वनि तरंगे इलेक्ट्रो मैग्नेटिक ऊर्जा पैदा करती हैं जिनका मान गीगा हर्ट्ज व टेरा हर्ट्ज तक पहुंचता है। जब हम किसी कांसे के बर्तन को निर्धारित चोट से कम व ज्यादा जोर से बजाते हैं तो ध्वनि तरंगे कम से अधिकतम मोड में प्रवेश करती हैं, जिससे एक इलेक्ट्रो मेगेनेटिक ऊर्जा क्षेत्र पैदा होता हैं, जिस क्षेत्र के सम्पर्क में आने से वायरस या विषाणुओं में कम्पन होने लगता है। कोरोना वायरस की बाहरी सतह (वाह्य भित्ति) बहुत ही कमजोर है जिससे इसे द्विपक्षीय ध्रुवीय क्षेत्र यानी डाईपोल में आते ही वायरस का न्यूक्लियस टूटने लगता है तथा ये निष्क्रियता की तरफ बढ़ जाती है।
ज्ञात रहे कि 5 बजे के सायें समय में हमारे सनातन में पूजन व ध्वनि गर्जन घण्टा गर्जन, व शंखनाद किया जाता था, मृत्यु के समय प्राणी के घर पर शंखनाद किया जाता है, जिसका सीधा- सीधा अर्थ जीवाणुओं का निष्क्रिय करना रहा है।
माइक्रोवेव थ्रेसहोल्ड एनर्जी कम्पन्न जो कांसे के बर्तन को कम से तीव्रता की तरफ बजाते हुए पैदा की जाती है, इसी प्रकार शंख ध्वनि भी तीव्र थ्रेसहोल्ड पर बजा कर उच्च माइक्रोवेव तरंगे पैदा करती हैं। यह कम्पन करके वायरस के आउटर सेल यानी बाहरी कवर को माइक्रो वेव इलेक्ट्रो मेगेनेटिक किरणों से थरथर्राहट से तोड़ देती है।
आज शाम 5 बजे सभी के द्वारा मिलकर अपने अपने घरों से विभिन्न प्रकार की जो ध्वनि गर्जना उत्पन्न की गयी है,इससे जहां सकारात्मक ऊर्जा बढ़ी है,मन प्रफुल्लित हुआ है,वहीं वातावरण में भी जीवाणु व वायरस का नाश भी हुआ है।

इस कार्यक्रम में बच्चों व युवाओं सहित सभी लोगों ने मिलकर की सहभागिता

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