कामना ! हरतालिका तीज व्रत कल

गाजीपुर, 01सितम्बर 2019। सुहागिनें महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए किया जाने वाला हरतालिका तीज व्रत कल मनाया जाएगा। सनातनी परम्परा के अनुसार हरतालिका तीज व्रत भादो माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को होता है। इस वर्ष तृतीया तिथि एक सितम्बर अर्थात आज से ही आरम्भ है।
विद्वानों के अनुसार चतुर्थी युक्‍त तृतीया को इस पर्व हेतु बेहद सौभाग्‍यवर्द्धक माना जाता है। ऐसे में कल 2 सितंबर को तृतीया का पूर्ण मान, हस्त नक्षत्र का उदयातिथि योग और सायंकाल चतुर्थी तिथि की पूर्णता तीज पर्व के लिए सबसे उत्तम है। अन्नपूर्णा, हनुमान, हृषिकेश व महावीर पंचाग के अनुसार 2 सितंबर को ही सौभाग्यव्रती महिलाओं के लिए व्रत सर्वोच्च है। ये सभी पंचाग 2 सितंबर की दोपहर 1.35 तक हस्त नक्षत्र बता रहे हैं। शास्त्रों के अनुसार तृतीया और चतुर्थी मिली हुई तिथि में तीज व्रत का पूजा करना सर्वोत्तम है।बताया गया है कि हस्त नक्षत्र में तीज का व्रत खोलना वर्जित है, जबकि रविवार 01 सितंबर को व्रत रखने वाली महिलाओं को 02 सितंबर को भोर में पारण हस्त नक्षत्र में ही करना पड़ेगा। यदि 02 सितंबर को हरतालिका तीज व्रत रखा जायेगा तो 03 सितंबर दिन मंगलवार को चित्रा नक्षत्र में पारण किया जा सकेगा, जो सौभाग्य-वृद्धि के लिए ज्यादा उचित रहेगा।
इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर शिव-पार्वती का विधि विधान से पूजन करती हैं। तीज की कथा के अनुसार सौभाग्यवती स्त्रियां अपने सुहाग को अखण्ड बनाए रखने और अविवाहित युवतियां मन मुताबिक वर पाने के लिए हरितालिका तीज का व्रत करती हैं। व्रती महिलाएं सूर्योदय से पूर्व ही नित्य कर्म से निवृत होकर नहा धोकर पूरा श्रृंगार करती हैं। पूजन के लिए केले के पत्तों से मंडप बनाकर गौरी−शंकर की प्रतिमा स्थापित की जाती है। इसके साथ पार्वती जी को सुहाग का सारा सामान चढ़ाया जाता है। रात में भजन, कीर्तन करते हुए जागरण कर तीन बार आरती की जाती है और शिव पार्वती विवाह की कथा सुनी जाती है।

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Author: Dr. A. K Rai

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