यज्ञ से होती है सकारात्मकता की वृद्धि – महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज

गाजीपुर (उत्तर प्रदेश), 21 मार्च 2018।


गाजीपुर की धरा आरम्भ से ही ऋषि मुनियों, विद्वानों, साहित्यकारों तथा मां के श्रद्धालुओं से पोषित रही है। जिले में माता के पवित्र भव्य मंदिरों में शुमार मां कामाख्या धाम करहिया, मां कष्टहारिणी धाम करीमुद्दीनपुर, मां भगवती धाम रेवतीपुर, मां चंडिका धाम बहादुरगंज, मां काली धाम सैदपुर सहित मां का अति प्राचीन पवित्र धाम हथियाराम मठ पर मां शक्ति की आराधना, साधना, उपासना तथा वैदिक अनुष्ठान का महापर्व बासंतिक नवरात्र श्रद्धा एवं विश्वास के साथ परंपरागत ढंग से मनाया जा रहा है। आज नवरात्रि के चौथे दिन वैभव व सौंदर्य की देवी श्रींगार गौरी का पूजन अर्चन कर श्रद्धालुओं द्वारा पाठ किया जा रहा है। श्रद्धालुजनों द्वारा अपने घरों में कलश स्थापित कर जगत जननी मां जगदंबा का पूजन अर्चन जारी है। मनिहारी क्षेत्र पंचायत के हरिहरपुर गांव स्थित प्रसिद्ध मां काली धाम परिसर में विश्व प्रसिद्ध सिद्धपीठ हथियाराम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर परम पूज्य स्वामी भवानीनंदन यती जी महाराज के निर्देशन में इस वर्ष भी ग्यारह कुंडिय यज्ञ अनुष्ठान की धूम मची है। इस मन्दिर में आस्था का प्रमुख केन्द्र यहां दक्षिणोन्मुखी स्थापित मां काली की तीन प्रतिमाएं हैं।
दक्षिण मुखी मां काली का नवरात्र में पूजन का विशेष महत्व है। यहां विधि विधान से पूजन अर्चन करने से श्रद्धालुओं की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

अपने दैैैनिक हरि हरात्मक पूजनोपरांत सिद्धपीठ हथियाराम मठ के पीठाधीश्वर स्वामी भवानी नंदन यति जी महाराज ने श्रद्धालु भक्त जनों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मां की आराधना व पूजन का विशेेष समय वर्ष में वासंतिक नवरात्रि तथा शारदीय नवरात्रि के रुप मे आता है। बासंतिक नवरात्रि के महत्व पर कहा कि इस समय प्रकृति अपने पुरानेपन को छोड़कर नवीनता धारण करती है, वृक्षों पर फल,फूल आते हैं और वातावरण आह्लादित हो उठता है।चारों तरफ खुशी और उमंग का भाव होता है। ऐसी उर्जा से भरपूर खुशनुमा समय में भक्ति भाव से की गयी मां की उपासना कभी व्यर्थ नहीं जाती।

कहा कि उपासना का मतलब समीप बैठना है अर्थात मां के सम्मुख बैठकर ध्यान लगाकर एकाग्र मन से अन्तःकरण की शुद्धि करना ही उपासना है।जिस प्रकार दूध में मक्खन है पर दिखता नहीं है ।उसे पाने के लिए मेहनत से मंथन करना होता है,उसी प्रकार ईश्वर को पाने के लिए भी अपने भटकते मन पर काबू कर उसे गुरु कृपा से मथना पड़ता है।इसलिए हमें नवरात्र में व्रत रखकर भक्ति भाव से मां का पूजन अर्चन करना चाहिए।इससे हमें अपनी विकृतियों को त्याग कर सत्कर्मों की ओर बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। पूजा पाठ तथा मंत्रों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मंत्र में असीमित शक्तियों का भंडार है तो यज्ञ की आहुतियोंं में असीमित ऊर्जा समाहित है। जहां मंत्रों का जाप, पूजन तथा यज्ञ की आहुतियां होती हैं,वहां सकारात्मक शक्तियों का वास और नकारात्मक उर्जा का नाश होता है। शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने से मन में उत्साह और नई ऊर्जा की वृद्धि तथा नव चेतना का संचार होता है। हवन तथा यज्ञ से जहां सकारात्मक शक्तियों का उदय होता है वहीं आसपास का वातावरण भी शुद्ध व सात्विक हो जाता है। श्री महाराज ने श्रद्धालु जनों से विश्व कल्याण हेेेतु भक्ति भाव से नवरात्र में मां का पूजन करने की सीख दी।

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