नब्बे वर्ष पुराने अनुदानित संस्कृत महाविद्यालय को ढहाने मामले की जांच आरम्भ 

एडीएम और एसडीएम ने स्थलीय निरीक्षण कर किया प्रबंधक व क्षेत्रीय लोगों के बयान दर्ज


गाजीपुर। सादात नगर पंचायत के वार्ड नौ स्थित करीब 90 वर्ष पुराने अनुदानित संस्कृत महाविद्यालय के भवन को ढहाए जाने और उसी भूमि पर नगर पंचायत कार्यालय के निर्माण को लेकर चल रहे विवाद की प्रशासनिक जांच शुरू हो गई है। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला द्वारा गठित जांच टीम में शामिल अपर जिलाधिकारी (भू.रा.) सुनील त्रिवेदी और सैदपुर एसडीएम ज्योति चौरसिया ने रविवार को मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया।

         जांच टीम ने महाविद्यालय के प्रबंधक योगेश्वर प्रसाद तथा क्षेत्रीय गणमान्य जनों तथा आसपास के लोगों से मामले की जानकारी ली। प्रबंधक ने विद्यालय की भूमि और उससे संबंधित दस्तावेज जांच अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए। वहीं स्थानीय निवासियों और पूर्व प्रधानाचार्य समेत अन्य लोगों ने अधिकारियों को बताया कि संबंधित भूमि पर लंबे अरसे से संस्कृत महाविद्यालय का संचालन होता रहा है। अधिकारियों ने प्रस्तुत दस्तावेजों और लोगों के बयानों को दर्ज कर लिया।

       जांच अधिकारियों ने बताया कि स्थलीय निरीक्षण और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रेषित की जाएगी। इसके बाद मामले में प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई तय होने की संभावना है।

16 सितंबर को ढहाया गया था भवन

विवाद का केंद्र वार्ड नौ में स्थित संस्कृत महाविद्यालय का भवन है, जिसका निर्माण वर्ष 1937 में स्व. रामशरण राम द्वारा कराए जाने की बात प्रबंधक और विद्यालय से जुड़े लोगों ने बताई। विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य हामिद सिद्दीकी और प्रबंधक योगेश्वर प्रसाद के अनुसार महाविद्यालय वर्तमान में भी संचालित है। विद्यालय प्रबंधन का आरोप है कि नगर पंचायत की ओर से संबंधित भूमि पर कार्यालय भवन का निर्माण कराया जा रहा है, जबकि इस संबंध में न्यायालय में याचिका भी दाखिल है। प्रबंधन ने भूमि के स्वामित्व और कब्जे से जुड़े शासनादेशों का हवाला देते हुए निर्माण पर आपत्ति जताई है। इन दावों की पुष्टि और भूमि की विधिक स्थिति का निर्धारण जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

      विद्यालय प्रबंधन के अनुसार 16 सितंबर को प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में निर्माण कार्य आगे बढ़ाया गया और महाविद्यालय की चहारदीवारी तथा कमरों को ढहा दिया गया। इसके बाद से ही यह मामला चर्चा में है।

भाजपा नेताओं ने भी किया था निरीक्षण

मामले की गम्भीरता को देखते हुए एक दिन पहले, शनिवार को भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय और वरिष्ठ भाजपा नेता सच्चिदानंद सिंह ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया था। उन्होंने मौके पर मौजूद जखनियां के नायब तहसीलदार विवेकानंद सिंह और हल्का लेखपाल से मामले की जानकारी ली तथा संस्कृत महाविद्यालय की भूमि पर नगर पंचायत कार्यालय के निर्माण को लेकर आपत्ति जताई। भाजपा जिलाध्यक्ष ने संस्कृत महाविद्यालय की भूमि को सुरक्षित रखने की मांग की। वहीं प्रशासनिक जांच शुरू होने के बाद अब स्थानीय लोगों और विद्यालय प्रबंधन की निगाह जांच रिपोर्ट पर टिकी है।

जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होगी भूमि की स्थिति

मामले में विद्यालय प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज, स्थानीय लोगों के बयान और राजस्व अभिलेख जांच का प्रमुख आधार होंगे। भूमि की श्रेणी, स्वामित्व, कब्जे तथा नगर पंचायत द्वारा निर्माण की वैधानिक स्थिति जैसे बिंदुओं पर जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। अब देखना है कि जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी स्तर से क्या निर्णय लिया जाता है।

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