सुप्रीम कोर्ट ! सीबीआई विवाद की जांच दो हफ्ते में पूरी करने के निर्देश तो अंतरिम चीफ पर नीतिगत फैसला लेने पर लगाई रोक

नई दिल्ली, 26 अक्टुबर 2018। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) में केन्द्र सरकार द्वारा की गयी कारर्वाई पर शीर्ष अदालत ने आज आलोक वर्मा की याचिका पर फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर कहा कि सीवीसी आलोक वर्मा के खिलाफ दो हफ्तों में जांच पूरी करें। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज के सुपरविजन में इस मामले की जांच होगी। वहीं अंतरिम प्रमुख सीबीआई चीफ पर कहा कि वह इस दौरान कोई बड़ा (नीतिगत) फैसला नहीं लें। कोर्ट ने कहा कि अंतरिम प्रमुख नागेश्वर राव ने अबतक जो फैसले लिए हैं, उसे सीलबंद लिफाफे में पेश किया जाए।


सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा की तरफ से सीनियर एडवोकेट फली एस नरीमन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने सीबीआई निदेशक को उनके अधिकारों से वंचित करने का आदेश दिया। केंद्र ने उसी दिन सीबीआई चीफ का चार्ज लेने के लिए दूसरे अधिकारी को नियुक्त कर दिया।
उल्लेखनीय है कि सीबीआई में अंदर भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे आंतरिक विवाद के मद्देनजर केंद्र सरकार ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज, एम नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक बना दिया था।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज़ के वकील प्रशांत भूषण के इस कथन पर विचार किया कि भ्रष्टाचार के व्यापक मुद्दे जांच एजेन्सी को प्रभावित कर रहे हैं और इसलिए जनहित याचिका पर शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता है।
पीठ ने भ्रूषण को इस मामले में सारा विवरण उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुये शीर्ष अदालत इस मामले में आलोक कुमार वर्मा की याचिका पर आज 26 अक्टूबर को सुनवाई के लिये तैयार हो गया था। इस मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी।

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