रामलीला ! सूपनखा की नाक कटाई तथा सीता हरण का हुआ मार्मिक मंचन
गाजीपुर(उत्तर प्रदेश),16 अक्टुबर 2018। अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी के तत्वाधान में रामलीला के दसवे दिन बन्दे वाणी विनायकौ आदर्श रामलीला मण्डल के कलाकारों द्वारा स्थानीय रामलीला स्थल लंका के मैदान मे सुपनखा नकटैया, खरदूषण बध, सीता हरण एवं जटायु मरण का जीवन्त मंचन किया गया।
प्रसंग में दर्शाया गया कि वनवास काल में श्रीराम,लक्ष्मण व सीता ऋषियों, मुनियों का दर्शन करते हुए एवं अत्रि ऋषि के निर्देशानुसार पंचवटी पहुंचकर पर्ण कुटी बनाकर रहने लगे। अचानक लंका पति राजा रावण की बहन शुर्पणखा घुमते हुए पंचवटी जाती है। वहां उसने देखा कि दो धनुषधारी वीर अपने एक स्त्री के साथ बैठे हैं, उनके निकट जाकर उनसे परिचय पुछते हुए अपने शादी का प्रस्ताव रखते हुए कहती है कि तुम सम पुरुष न मो सम नारी, यह संयोग रचेहू विचारी। तुम्हारे जैसा पूरुष मेरे जैसी सुन्दर नारी, तीनो लोक मे नही मिलेगी। अतः तुम मेरे साथ शादी कर लों। शुर्पणखा की बातों को सुनते हुए श्रीराम कहते है कि हे सुन्दरी मेरी तो शादी हो चुकी है , अगर तुम चाहों तो मेरे छोटे भाई लक्ष्मण से शादी कर सकती हो। श्रीराम के बातों को सुनकर लक्ष्मण के पास जाकर उपरोक्त बातों को रखते हुए शादी हेतु निवेदन करती है। लक्ष्मण ने कहा कि मै तो अपने बड़े भाई श्रीराम का सेवक हॅू। वही जो चाहेगे करेगे। अतः कई बार इधर-उधर घुमने लगी जब उसने दोनो तरफ से निराश हो गयी तो वह अपने असली रुप में आकर सीता पर झपटी, तब श्रीराम की आज्ञा पाकर लक्ष्मण ने उसके नाक को अपने तलवार से काट देते है।

वह बहते रुधिर के साथ अपने भाई खरदूषण के पास जाकर सारा बृतान्त बताती है, तो उसकी सारी बातों को सुनकर खरदूषण चतुरंगिणी सेना के साथ श्रीराम लक्ष्मण से युद्ध करने के लिए अाते हैं । युद्ध के दौरान श्रीराम खरदूषण को युद्ध भूमि में मार गिराते हैं। इसके बाद शुर्पणखा खरदूषण को मरा हुआ देखकर रोती विलखती वह अपने बड़े भाई लंका पति रावण के पास जाकर सारा बृतान्त बताती है और उन्हे युद्ध के लिए मजबूर कर देती है। अपने बहन शुर्पणखा की बातों को सुनकर महाराज रावण ने कहा कि जब तुम्हारा नाक कटा तो खरदूषण कहा थे। उनकी बातो को सुनकर शुपर्णनखा कहती है कि वे दोनो भाई युद्ध के लिए गये थे और वही पर वीरगति को प्राप्त हो गये। इतना सुनते ही रावण क्रोधित होकर अपने राज दरबार से अपने मामा मारीच के पास जाकर उनसे कहता है कि आप सोने का हिरण बनकर मेरे साथ पंचवटी को चलें क्योकि हमारी बहन शुपर्णखा का नाक दो वनवासियों ने काट दिया है। जब मारीच ने सुना कि महाराज रावण श्रीराम जी से बैर करने जा रहे है तो उसने समझाया कि महाराज श्रीराम से युद्ध करना आपके हित में हानिकारक है। क्योकि महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा के लिए दोनो भाई उनके आश्रम गये थे। जब हम लोग यज्ञ को विध्वंश करने के लिए गये तो उन्होने एक वाण मारा, उनके वाण से सुवाहु तो मर गया लेकिन मै सतयोजन पार जाकर नदी के किनारे गिरा। उनसे बैर न करे तो अच्छा है। मारीच की बातों से रावण क्रोधित होकर कहता है कि मै तुम्हारे दरवाजे पर शिक्षा लेने नही आया हॅू। तुम मेरे साथ चलते हो या नहीं। मैं अपने तलवार से तुम्हे अभी यह पर मार डालूंगा। तब वह डर के मारे तैयार होकर कहा कि चलिये महाराज आपके हाथ से मरने से तो अच्छा है कि श्रीराम के हाथ से मरुं। मेरी मुक्ति होगी। इतना कहते हुए पुष्पक विमान पर सवार होकर रावण के साथ पंचवटी जाकर सोने का मृग बनकर कुटी के चारों ओर विचरने लगे इतने में सीता का ध्यान स्वर्ण मृग पर पड़ा तो श्रीराम से शिकार करने के लिए निवेदन करने लगी।

सीता जी के निवेदन को सुनते हुए श्रीराम धनुष वाण उठाकर मृग के पीछे चल देते है। घोर जंगल में जाकर अपनी एक वाण से मृग को मार देते हैं। वह जमीन पर गिर पड़ता है। उसके बाद हाय लक्ष्मण, हाय सीते, कहते हुए अपने प्राण को त्याग देता है। उसके आवाज को सुनकर सीताजी घबराती हुई लक्ष्मण को भेजती हैं ,सीताजी के बातो को सुनकर लक्ष्मण जी कुटिया के चारो तरफ लक्ष्मण रेखा खीचकर अपने भाई श्रीराम के मदद के लिए निकल पड़ते हैं। रावण कुटिया को सूना पाकर साधु का वेष धारण कर सीता से भिक्षा का निवेदन करता है। जब सीता कंदमूल फल थाली में लाती हैं तो रेखा के अन्दर सीता जी को देखकर कहता है कि आप रेखा के बाहर आकर भिक्षा देते तो मै ग्रहण करुगा। सीता जी साधु के बात को सुनकर रेखा के बाहर आती है इतने में रावण उनकी बांह पकड़कर उठाकर अपने विमान पर बैठाकर आकाश मार्ग से लंका के लिए प्रस्थान करता है। जब श्रीराम लक्ष्मण अपनी कुटिया में आते है तो सीता को न पाकर उन्हे खोजने जंगल झाड़ियों में निकल जाते हैं और वहा पशु पक्षियों से पूछते है कि हे खग मृग हे मधुकर श्रेणी तुम देखी सीता मृग नैनी। श्रीराम पूछते हुए आगे जाते है। कुछ दूर आगे जाने पर श्रीराम ने गिद्धराज जटायु को अधमरा देखकर कहा कि हे तात आपकी दशा किसने किया तो गिद्धराज जटायु ने कहा कि तुम्हारी भार्या सीता को लंकापति रावण आकाश मार्ग से विमान द्वारा दक्षिण दिशा की ओर ले गया, मैने रावण से युद्ध किया

लेकिन वह अपने चन्द्रहास तलवार से मेरे दोनो पंखो को काट दिया जिससे मै अधमरा होकर जमीन पर गिर पड़ा। इतना कहने के बाद वह अपने शरीर को श्रीराम के गोद में ही त्याग देता है। इस लीला को देखकर दर्शक भाव विभोर हो जाते है।
इस अवसर पर कमेटी के अध्यक्ष दीनानाथ गुप्ता, उपाध्यक्ष विनय कुमार सिंह, मंत्री ओमप्रकाश तिवारी उर्फ बच्चा, उपमंत्री पं. लवकुमार त्रिवेदी उर्फ बड़े महाराज, प्रबन्धक बीरेश राम वर्मा, उपप्रबंधक शिवपूजन तिवारी, राजकुमार शर्मा, राम सिंह यादव, पं. बालगोविन्द त्रिवेदी, वैष्णो त्रिवेदी, कृष्णांश त्रिवेदी सहित हजारों लोग उपस्थित रहे।
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