रामलीला ! चरण पादुका लेकर लौटे भरत, दर्शक हुए भावविभोर

गाजीपुर(उत्तर प्रदेश),13 अक्टुबर 2018। अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी के तत्वाधान में कलाकारों द्वारा सकलेनाबाद में भारद्वाज मुनि के आश्रम पर भरत द्वारा श्रीराम मनौवल और फिर भरत द्वारा राम की चरणपादुका लेकर विदाई से सम्बन्धित लीला का मंचन किया गया।


प्रसंगानुसार इससे पूर्व जब श्रीराम के वन जाने के वियोग में महाराज दशरथ अपना नश्वर शरीर त्याग स्वर्ग सिधार गये तो कुल गुरु वशिष्ठ ने मंत्री सुमन्त को भरत व शत्रुघ्न को उनके ननिहाल से बुलाने तथा कुमार भरत के आने तक अयोध्या का राज देखने को कहा। इसके बाद सुमन्त श्रीधर को घोड़े पर सवार होकर कैकेय देश के लिए प्रस्थान करने को कहते है। सुमन्त के आदेशानुसार दूत श्रीधर वायुवेग से दौड़ने वाले घोड़े पर सवार होकर कैकेय देश के लिए प्रस्थान करते है, और गुरुदेव के निर्देशानुसार सारा समाचार भरत जी से बताते है। भरत जी श्रीधर के बातों को सुनकर अपने नाना से आदेश लेकर अयोध्या के लिए प्रस्थान करते हैं। उनका रथ जब अयोध्या में प्रवेश करता है तो रास्ते के अयोध्यावासी उन्हें देख मुंह फेर लेते हैं, सबके मुख फेर लेने पर भरत को कुछ संदेह होता है, और अपने रथ से उतर कर माता महारानी कैकेयी के कक्ष में जाकर सारी बाते सुनते हैं। जब उन्होने अपनें माता से सुना कि महाराज दशरथ जी स्वर्ग सिधार गये और राम, लक्ष्मण व सीता वन के लिए प्रस्थान कर गये और अयोध्या का राज महाराज दशरथ ने उन्हें सौंप दिया था। इतना सुन माता कैकेयी को धिक्कारते हुए वे चिन्नित हो जाते हैं और थोड़ी देर बाद अपनी तीनों माताओं, चतुरंगणी सेना व अयोध्यावासियों के साथ अपने भाई श्रीराम को मनाने के लिए वन जाने का निर्णय करते हैं। सेना के साथ भरत को आते देख लक्ष्मण दौड़कर श्रीराम से भरतजी के आने की सूचना देते है। लक्ष्मण द्वारा सूचना पाते ही श्रीराम भरत से मिलने के लिए दौड़ जाते है। भाई भरत से सारे अयोध्या का हालचाल सुनकर जब पिता महाराज दशरथ के स्वर्ग सिधारने का पता चला तो वे ब्याकुल होते है। इस पर कुलगुरु वशिष्ठ ने श्रीराम को उदास देख कहा कि “सुनहू भरत भावी प्रबल, विलख कहेहू मुनिनाथ, हानि लाभ, जीवन मरण जस अपजस विधि हाथ” अर्थात होनी बड़ी प्रबल है, जो आया है, उसको एक न एक दिन जाना है। इस तरह के बाते को समझाते हुए श्रीराम को गुरुदेव धैर्य बंधाकर बाद सरजू नदी के किनारे ले जाकर स्वर्गीय महाराज दशरथ को तिलान्जली दिलाते है।
भरत जी की शोभायात्रा अयोध्या (हरिशंकरी) से शुरु होकर मुरली कटरा, पावर हाउस रोड (लालदरवाजा) आकर रथ पर सवार होकर झुन्नूलाल चौरहा, आमघाट, महिला महाविद्यालय, राजकीय बालिका इण्टर कालेज, बाबा पहाड़खाॅ का पोखरा होते हुए दूर्गाचौक स्थित भारद्वाज मुनि के आश्रम पर पहुंची जहां लीला का सजीव मंचन किया गया। इस मौके पर कमेटी के अध्यक्ष दीनानाथ गुप्ता, उपाध्यक्ष विनय कुमार सिंह, मंत्री ओमप्रकाश तिवारी उर्फ बच्चा, उपमंत्री पं. लवकुमार त्रिवेदी उर्फ बड़े महाराज, प्रबन्धक दीरेष राम वर्मा, उपप्रबंधक शिवपूजन तिवारी, राजकुमार शर्मा, राम सिंह यादव, पं. बालगोविन्द दत्त त्रिवेदी उर्फ राजन भैया सहित हजारों लोग उपस्थित रहे।

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