सर्वोच्च न्यायालय ! रंजन गोगोई को राष्ट्रपति ने दिलाई मुख्य न्यायाधीश की शपथ
नई दिल्ली, 03 अक्टुबर 2018 । राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज जस्टिस रंजन गोगोई को देश के 46वें प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) के तौर पर 63 वर्षीय न्यायमूर्ति गोगोई को राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में सम्पन्न समारोह में शपथ दिलाई। जस्टिस गोगोई का कार्यकाल नवंबर 2019 तक होगा। सीजेआई जस्टिस दीपक मिश्रा के विदाई समारोह में अपने वक्तव्य में जस्टिस गोगोई ने कहा था कि उनका सबसे बड़ा योगदान ‘सिविल लिबर्टी’ के मामले में है। उल्लेखनीय है कि जस्टिस गोगोई असम के निवासी हैं। उनका जन्म 18 नवंबर 1954 को हुआ था। उन्होंने 1978 में वकालत आरम्भ की थी और संवैधानिक, टैक्सेशन और कंपनी मामलों में गुवाहाटी हाईकोर्ट में लंबे समय तक वकालत की। उन्हें 28 फरवरी, 2001 को गुवाहाटी उच्च न्यायालय में ही परमानेंट जज के रूप में नियुक्त किया गया और फिर 9 सितंबर 2010 को जस्टिस गोगोई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया गया। 12 फरवरी 2011 को उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इसके बाद 23 अप्रैल 2012 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर नियुक्त किया गया था।
उन्होंने एनसीआर पर सुनवाई के लिए बने स्पेशल बेंच की अध्यक्षता भी की है। सार्वजनिक विज्ञापन के जरिए राजनेताओं के महिमामंडन के खिलाफ फैसला देने वाले जस्टिस गोगोई सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों में शामिल रहे हैं।
बताते चलें कि जस्टिस गोगोई सुप्रीम कोर्ट के उन चार जजों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने 12 जनवरी 2018 को एक अप्रत्याशित प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सुप्रीम कोर्ट के कामकाज के तरीके और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए गए थे।
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