परीक्षा सूचना ! यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं 7 फरवरी से, 30 अप्रैल तक घोषित होगा परिणाम
लखनऊ (उत्तर प्रदेश),17 सितंबर 2018।उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि व्यवस्थित ढंग से काम किया जा रहा है और आगामी 2019 में 16 दिन में यूपी बोर्ड परीक्षाएं खत्म करेंगे। इस बार 7 फरवरी से परीक्षाएं होगी। हाईस्कूल की 14 और इंटर की 16 दिनों में होंगी। 2 मार्च तक परीक्षा खत्म करेंगे। सवा 3 घंटे का पेपर होगा। 8 बजे से परीक्षा शुरू होगी। हाईस्कूल में 36 विषयों में 1-1 पेपर होगा। एनसीआरटी में एक ही पेपर होता हैं।उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने कहा है कि छह फरवरी से होने वाली यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में इस बार और सख्ती होगी। नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए अभी से काम शुरू कर दिया है। इंतजामों पर नजर रखने के लिए कमेटी बना दी गई है।
कल रविवार को विकासभवन में मीडिया से रूबरू डिप्टी सीएम ने कहा कि इस बार परीक्षा कक्ष में दोनों ओर सीसीटीवी और वायस रिकार्डर लगेंगे। केंद्र से 200 मीटर की परिधि के अंदर प्रबंधक या प्रबंध समिति के लोगों को आने की अनुमति नहीं होगी। डीएम की अध्यक्षता में कमेटियां गठित कर दी गई हैं जो केंद्र निर्धारण के मानकों को पूरा कराएंगी। साथ ही देखेंगी कि केंद्र पर शौचालय, लाइट के लिए जेनरेटर या इनवर्टर पक्की चारदीवारी आदि अनिवार्य रूप से हैं या नहीं।
उप मुख्यमंत्री नेआंकड़ों के हवाले से कहा कि नकल पर शिकंजा कसने से छात्रों की संख्या कम हो गई। पिछले वर्ष 67.22 लाख छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया था लेकिन सख्ती के कारण 11 लाख परीक्षार्थी परीक्षा छोड़ गये। पिछली बार 1.81 लाख प्राइवेट बच्चों के पंजीकरण हुए थे लेकिन, इस बार पारदर्शितापूर्ण पंजीकरण कराने पर यह संख्या 93 हजार पर रह गई। इस बार भी नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए और सख्ती की जाएगी। डिप्टी सीएम ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में अमूलचूल सुधार किए जा रहे हैं। निजी स्कूलों की फीस में मनमानी पर एक्ट बना दिया गया है। जिस पर राज्यपाल के हस्ताक्षर हो गए हैं। निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने का अधिकार कमिश्नर के बजाय जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी को होगा। फीस पर मनमानी लगाने को 20 सितंबर तक कमेटियों का गठन करना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि हमने डिग्री कालेजों के प्रवक्ताओं को सातवां वेतन आयोग का लाभ दिया है। इसके लिए 921 करोड़ धनराशि अवमुक्त कर दी है। पिछली सरकार ने पांच साल में महज 48 कालेज खुले थे। जबकि, हमने एक साल में 205 कालेजों को मंजूरी दी है। इनमें 166 को पंडित दीनदयाल माडर्न स्कूल के रूप मे विकसित किया है।
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