प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने दिखाया हुनर
विद्यार्थियों को मंच प्रदान कर प्रतिभा उजागर करने हेतु संकल्पित है साहित्य चेतना समाज
मिर्जापुर। साहित्य चेतना समाज की जिला इकाई के तत्वावधान में भरूहना स्थित मां विंध्यवासिनी महाविद्यालय में सामान्य ज्ञान, निबंध एवं चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें नगर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न विद्यालयों के सैकड़ों विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
प्रतियोगिता को चार वर्गों में विभाजित किया गया था, जिसमें कक्षा चार से 12 तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया। निबंध प्रतियोगिता में कनिष्ठ वर्ग के लिए ‘भोजन’, मध्यम वर्ग के लिए ‘नारी सशक्तिकरण’, ज्येष्ठ वर्ग के लिए ‘विद्यार्थी जीवन’ और वरिष्ठ वर्ग के लिए ‘भारतीय संविधान’ विषय निर्धारित किए गए थे। प्रतिभागियों ने निर्धारित विषयों में से एक का चयन कर अपने विचार प्रस्तुत किए।
चित्रकला प्रतियोगिता में कनिष्ठ वर्ग के लिए ‘पेड़ लगाओ-जीवन बचाओ’, मध्यम वर्ग के लिए ‘नशामुक्त भारत’, ज्येष्ठ वर्ग के लिए ‘डिजिटल भारत’ तथा वरिष्ठ वर्ग के लिए ‘नारी सशक्तिकरण-समानता की ओर’ विषय रखे गए।
संस्था के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने बताया कि बिना शासकीय वित्तीय सहायता के संस्था पिछले चार दशकों से विद्यार्थियों और युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए विभिन्न ज्ञानवर्धक कार्यक्रम आयोजित करती आ रही है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिताओं का उद्देश्य विद्यार्थियों की प्रतिभा को सामने लाने के साथ उन्हें रचनात्मक गतिविधियों के लिए मंच उपलब्ध कराना है। संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी ने प्रतियोगिता को शुचिता, पारदर्शिता और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए मिर्जापुर इकाई के पदाधिकारियों को बधाई दी। महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ. नीरज त्रिपाठी ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देने के संस्था के प्रयास की सराहना की।
प्रतियोगिता प्रभारी सृष्टिराज ने बताया कि प्रतियोगिता का परिणाम नवंबर में घोषित किया जाएगा। चयनित प्रतिभागियों को दिसंबर में आयोजित होने वाले संस्था के वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह ‘चेतना महोत्सव’ में स्मृति-चिह्न और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
प्रतियोगिता के आयोजन में आनंद अमित, नंदिनी वर्मा, अरुणेश कुमार, केदारनाथ सविता, आनंद केशरी, अन्नू, मयंक, कुलभूषण पाठक और विजय श्रीवास्तव मिर्जापुरी सहित अन्य लोगों ने सहयोग किया।
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