खतरा निशान पार कर उपर की ओर बढ़ी गंगा 

गाज़ीपुर। सावन माह के बाद भाद्रपद माह में हो रही बरसात ने किसानों को खुशहाल बना दिया है। वहीं पहाड़ी और मैदानी इलाकों में हुई बरसात ने भी गंगा नदी के जलस्तर में उफान ला दिया है। रह रह कर हो रही बरसात ने धरती, पशु-पक्षी, खेत और आमजन को अपनी बूंदों से सरोबार किया है और अब खेतों में पानी और हरियाली दिखने लगी है। बरसात से जिले में गंगा नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। इससे नदी किनारे बसेरा बनाए लोग अपना आशियाना छोड़ सुरक्षित ठौर की फिराक में जाने लगे हैं।


     एक सितम्बर को गंगा का जल स्तर खतरा बिन्दु को पार कर गया है। संध्या तीन बजे गंगा का जलस्तर 63.330 मीटर पर पहुंच गया है और बढ़ाव लगातार जारी है।

          उल्लेखनीय है कि जिले में गंगा के जलस्तर की सीमा निर्धारित है। इसके अनुसार, सामान्य जलस्तर 59.906 मीटर, चेतावनी बिंदु 62.100 मीटर, खतरा बिन्दु 63.105 मीटर तथा बाढ़ का उच्च स्तर 65.220 मीटर है।     

         यदि गत वर्षों की स्थिति पर नजर डालें तो वर्ष 2019 में बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.530 मीटर, वर्ष 2021 बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.680 मीटर, वर्ष 2022 बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.390 मीटर, वर्ष 2023 में बाढ़ का उच्च जलस्तर 61.700 मीटर तथा वर्ष 2025 में बाढ़ का उच्च जलस्तर 64.690 मीटर रहाl

      जनपद में बाढ़ की संभावित स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला एवं पुलिस अधीक्षक डॉ ईरज राजा द्वारा बाढ़ प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर मातहतों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।  बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने से पूर्व ही पर्याप्त मात्रा में राहत सामग्री एवं बाढ़ से बचाव और राहत कार्यों में उपयोग होने वाली आवश्यक सामग्री की व्यवस्था सुनिश्चित कर ली जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।  संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि बाढ़ एवं कटान से प्रभावित होने वाले लोगों के लिए पहले से ही पर्याप्त राहत सामग्री, नाव आदि की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस दौरान उन्होंने ग्राम प्रधान तथा स्थानीय लोगों से संवाद कर जानकारी भी ली। साथ ही बड़ी संख्या में पशुओं के प्रभावित होने की स्थिति को देखते हुए पर्याप्त मात्रा में चारा-भूसा आदि की व्यवस्था भी पहले से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाढ़ एवं कटान की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाए तथा किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित लोगों को तत्काल राहत एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए। प्रशासन द्वारा बाढ़ से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय से पूर्ण करने पर विशेष जोर दिया गया। 

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