काव्य-गोष्ठी में कवियों ने बिखेरी छटा
गाजीपुर। ‘अखिल भारतीय साहित्य परिषद्’ की जिला इकाई के तत्वावधान में खालिसपुर में काव्य-गोष्ठी संपन्न हुई। इकाई-प्रमुख एवं कवि हरिशंकर पाण्डेय के संयोजन में आयोजित काव्यायोजन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि रामदेव पाण्डेय ने तथा संचालन वीर रस के प्रख्यात कवि दिनेश चन्द्र शर्मा ने किया।
कार्यक्रम का आरम्भ कवि कामेश्वर द्विवेदी की मंगलमयी वाणी-वन्दना से हुआ, तत्पश्चात युवा ग़ज़ल-गो गोपाल गौरव ने अपनी ग़ज़ल “खुश्बुए शेर से महक जाए जहां/तुम ग़ज़ल में ज़रा रातरानी लिखो” प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी तो वरिष्ठ गीतकार हरिशंकर पाण्डेय ने “ये ज़िन्दगी हमारी किस मोड़ पर ले आई/किसकी करूॅं तिजारत ये समझ ही न पाई।” प्रस्तुत कर तालियां बटोरी। नवगीतकार डॉ. अक्षय पाण्डेय ने “कन्धों पर ढोते रहना है हमें पेट औ पीठ/जीवन में कुछ राग-रंग हो पीला हरा-मजीठ …सुनाकर सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा का संदेश दिया। युवा कवि मनोज यादव ‘बेफिक्र’ ने “ख़ुद तो सुधरें, उन्हें सुधारें जो पीढ़ी आने वाली है। खुशियों की वह बगिया होगी, जिनके हम सब बनमाली हैं।” से प्रेरक स्वर दिया। युवा कवि सुधाकर चौबे ने “मैं कपट झूठ से बनी हुई/तुम पार्टी ईमानदार प्रिये” के राजनीतिक व्यंग्य कविता प्रस्तुत कर खूब वाहवाही अर्जित की।वीररसावतार दिनेशचंद्र शर्मा ने “पाक शासक तुम्हारी इस बेइंसाफी मंशा को हरगिज़ पनपने नहीं देंगे।”के द्वारा श्रोताओं में ओज का संचार किया।महाकवि कामेश्वर द्विवेदी ने “मीत! है कुछ मिटाने की चाहत अगर/ तो घृणा द्वेष ईर्ष्या मिटा दीजिए।”प्रस्तुत कर अतीव प्रशंसा अर्जित की। अध्यक्षीय काव्यपाठ में वरिष्ठ कवि रामदेव पाण्डेय ने “आपन सुख लुटावत बानी, दिन भर रहींला सरेह में। तिकवत रहीं हरदम खेत में, संग-संग बनिहारन क, कटिया करावत बानी।” से ग्रामीण जीवन की श्रम-संवेदना को सजीव कर दिया।
इस अवसर पर संजीव कुमार पाण्डेय, नन्दकिशोर सिंह, शशिकान्त पाण्डेय, लल्लन पाण्डेय, देवेन्द्र कुमार सिंह, बृजकिशोर सिंह, रामानुजन पाण्डेय,संजय सिंह सहित काफी संख्या में साहित्य-प्रेमी उपस्थित रहे। अन्त में आभार ज्ञापन राजेन्द्र पाण्डेय ने किया।
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