कुटुंब प्रबोधन, समरसता, पर्यावरण, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्य हैं संघ के पंच परिवर्तन

उठो, जागो और राष्ट्र निर्माण में लगो – महामंडलेश्वर भवानी नन्दन यति जी महाराज


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी का विरोधी नहीं – रामलाल जी

गाजीपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल जी ने कहा कि जग नहीं सुनता कभी दुर्बल जनो का शांति प्रवचन, सिर झुकाता है उन्हें जो कर सके रिपु मान मर्दन। दुनिया ताकत की सुनती है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत को ताकतवर बना रहा है। हमारी सेना ने आतंकी कैम्पों को नष्ट कर विश्व में भारत की धाक जमाई है।

       गाजीपुर के बोरसिया स्थित सत्यदेव डिग्री कॉलेज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, काशी प्रान्त के पन्द्रह दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह को मुख्य वक्ता के रूप में शुक्रवार को 

व्यक्त किया। उन्होंने स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए गुरु गोलवलकर को उद्धृत करते हुए आगे कहा कि भारत की सभी भाषा राष्ट्रीय भाषा है। भाषा, प्रान्त, जाति के झगड़े होते है यह शाखा से समाप्त होगी। संघ में छुआछुत, अगड़ा-पिछड़ा कुछ नहीं है। यहाँ सब एकसाथ भोजन करते और कराते हैं। यहाँ कोई किसी की जाति नहीं पूछता। नागपुर में कार्यकर्ता विकास वर्ग- द्वितीय (तृतीय वर्ष) लगता है। यहाँ देशभर के अलग अलग प्रान्तों से स्वयंसेवक एवं शिक्षक आते है। संघ का उद्देश्य है सामूहिकता है। स्वयंसेवक बिना स्वार्थ के सेवा करते है। कोरोनकाल में जब समाज पर संकट आया तो पाँच लाख स्वयंसेवक सहायता में लगे। किसी ने कोई जाति, धर्म, पंथ नहीं पूछा। बाढ़ में सहायता करने के दौरान केरल में अपने चार स्वयंसेवकों की जान चली गई। आज स्वयंसेवक सेवा के 1.5 लाख सेवा कार्य कर रहा है।     

         रामलाल जी ने कहा कि लोग संघ के विरोधी हो सकते है संघ किसी का विरोधी नहीं है। रामजन्मभूमि प्राण प्रतिष्ठा का उदाहरण देते हुए कहा कि प्राण प्रतिष्ठा में मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने सभी को आमंत्रित किया। कुछ लोग स्वार्थवश हिन्दू संगठनों को कम्युनल कहते हैं। हिन्दू में हिन्दू कहीं नही लड़ रहा है और न ही कोई हिन्दू से लड़ रहा। हम वसुधैव कुटुम्बकम की बात करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि  

यह हिन्दू राष्ट्र है, बनाने की जरूरत नहीं। इसके मूल में ही हिन्दू विराजमान है। उन्हें संघ के पंच परिवर्तन कुटुंब प्रबोधन, समरसता, पर्यावरण, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्य की भी बात की।

मुख्य वक्ता ने कहा संघ के संस्थापक डॉ हेडगेवार ने सोच विचार के संगठन शुरू किया तब हिन्दू समाज बिखरा था। राष्ट्रभक्ति बिना स्वतंत्रता संभव नहीं थी। डॉ हेडगेवार स्वतंत्रता से पहले और स्वतंत्रता के बाद कई बार जेल गए।

       कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध सिद्धपीठ हथियाराम मठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भवानी नन्दन यति जी महाराज ने कहा कि प्रचारक रूपी संतो ने अपना जीवन भारत माँ को समर्पित किया है। महाराज जी ने कहा उठो जागो और राष्ट्र निर्माण में लगो, इसलिए ही मेरा जन्म हुआ है। जीवन सार्थक तब तक नहीं होता जब तक ध्येय की पूर्ति न हो। उदाहरण देते हुए कहा कि गोमुख से निकलने वाली गंगा गंगासागर न पहुँच जाए तब तक सार्थक नहीं होता। उन्हें आगे कहा कि मेरा मन यह देख कर कह रहा है राम का राष्ट्र प्रेम वापस आने वाला है, भारत बदल रहा है।

       अतिथियों के उद्बोधन से पूर्व इस वर्ग में प्रशिक्षण ले चुके स्वयंसेवकों का दण्ड, नियुद्ध, पदविन्यास, सामूहिक समता, व्यायाम योग, आसन इत्यादि शारीरिक प्रधान कार्यक्रम हुए। पूर्ण गणवेश में घोष वादन कर रहे स्वयंसेवक आकर्षण का केन्द्र रहे। मंचस्थ अधिकारियों का परिचय नागेंद्र जी ने कराया। मंच पर मंचासीन अतिथियों में पूज्यपाद भवानीनन्दन यति जी, अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल जी, सर्वाधिकारी मालकियत सिंह बाजवा जी, प्रान्त संघचालक अंगराज जी एवं जिला संघचालक जयप्रकाश जी रहे।

          संघ शिक्षा वर्ग के वर्ग कार्यवाह दीपनारायण जी ने वर्ग प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि काशी प्रांत के 27 जिलों से  270 शिक्षार्थी आए। सभी ने अपना शुल्क, मार्ग व्यय एवं गणवेश स्वयं अपने खर्च से पूरा किया। कार्यक्रम का संयोजन मुख्य शिक्षक दीपक जी एवं राजेश जी सह मुख्य शिक्षक द्वारा किया गया। कार्यक्रम में इस वर्ग के वर्ग पालक प्रान्त कार्यवाह मुरली पाल जी, प्रान्त प्रचारक रमेश जी, सह प्रान्त कार्यवाह राकेश जी, प्रान्त प्रचारक प्रमुख रामचंद्र जी, विभाग प्रचारक  अजीत जी, विभाग संघचालक सच्चिदानंद राय आदि उपस्थित रहे। आभार ज्ञापन अशोक राय जी द्वारा किया गया।

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