बजट – बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत 

गाजीपुर। आम बजट पर प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। यदि बजट के सकारात्मक पहलुओं को देखें तो वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का सातवीं बार प्रस्तुत बजट अपने आप में एक रिकॉर्ड है। कृषि क्षेत्र के लिए डेढ़ लाख करोड़ तथा महिला सशक्तिकरण के लिये तीन लाख करोड़ रुपये का प्राविधान किया गया है जो प्रशंसनीय है।


        स्वामी सहजानन्द पीजी कालेज के प्राचार्य प्रो. वी के राय ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इसके साथ ही शिक्षा-चिकित्सा और सुरक्षा उपक्रमों को और मजबूत किये जाने की जरूरत थी। कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास बनाने की बात तो कही गयी पर राजधानी में देश के कोने कोने से उच्च शिक्षा के लिए आने वाले छात्र छात्राओं के लिए कालेजों में छात्रावास नहीं हैं और असम-मड़ीपुर लगायत केरल-तमिलनाडु की लड़कियां दिल्ली के मुहल्लों में पीजी और प्राइवेट व्यस्वस्थाओं में रहने के लिए विवश हैं, यह विचारणीय प्रश्न है।

      करदाताओं के लिए मानक कटौती 50 से 75 हजार किये जाने की घोषणा ऊंट के मुंह मे जीरा भी नहीं है. करदाताओं का पैसा बिहार और आंध्र प्रदेश के लिए जिस उदारता के साथ खर्चने की योजनाएं बताई गयीं, उनकी तारीफ नहीं की जा सकती‌ यही नहीं सरकार की पीपीपी मॉडल और कौशल विकास योजना पटरी से उतरती गयी हैं। आवश्यकता इस बात की है कि शिक्षा और रोजगार के स्तरोन्नयन के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत है। उच्च शिक्षा में नई शिक्षा नीति का अनुप्रयोग भी नाकाफी रहा है और इसकी विफलताओं के छेद मुद्दे जाने की आवश्यकता है।

      स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गाजीपुर के प्राचार्य प्रोफेसर राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने कहा कि बजट में उच्च शिक्षा, कृषि और आयकर पर विशेष ध्यान दिया गया है। उच्च शिक्षा के लिए 1,000 करोड़ रुपये की वृद्धि से छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, जिससे वे आधुनिक तकनीकों और ज्ञान से लैस हो सकेंगे। साथ ही, शिक्षा ऋण की ब्याज दरों में कमी की गई है, जिससे छात्रों को उन्नत शिक्षा प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। कृषि क्षेत्र के लिए 5,000 करोड़ रुपये की अनेक योजनाओं की घोषणा की गई है, जिससे किसानों की आय में 20 फीसदी तक वृद्धि होने की उम्मीद है और वे आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन में 15 फीसदी तक की वृद्धि कर सकेंगे। आयकर में बदलाव करते हुए, कर स्लैब में सुधार किया गया है, जिससे मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी और उनके खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी। यह बजट उच्च शिक्षा, कृषि और आयकर में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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