सिद्धपीठ हथियाराम मठ में वृद्धम्बिका माता का पूजन करेंगे आर एस एस प्रमुख मोहन भागवत

गाज़ीपुर । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत का सिद्धपीठ हथियाराम मठ में बुधवार 19 जुलाई को आगमन हो रहा है। संघ प्रमुख आध्यात्मिक सिद्ध पीठ हथियाराम मठ में पूजन अर्चन कर रात्रि प्रवास भी करेंगे।

      संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत का यह कार्यक्रम आध्यात्मिक उर्जा व लोककल्याण की भावना का हिस्सा है। इस दरम्यान वह मठ की अधिष्ठात्री देवी बुढ़िया माता का दर्शन पूजन, पीठाधिपति के चातुर्मास महायज्ञ में रुद्राभिषेक, मंचीय कार्यक्रम, नवग्रह वाटिका की स्थापना, महाराजश्री से संवाद आदि कार्यक्रम सम्पादित करेंगे। 

     सिद्धपीठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भवानी नन्दन यति महाराज ने यह जानकारी सोमवार को पत्र-प्रतिनिधियों को दी।  स्वामी भवानी नन्दन यति महाराज ने बताया कि संघ प्रमुख विगत वर्ष मार्च माह में जब यहां आये थे और यहां विशेष आध्यात्मिक उर्जा मिलने की बात कहते हुए मौका मिलने पर दुबारा यहां आने की इच्छा जतायी थी, जो अब पूरी होने जा रही है। यह कार्यक्रम संगठन, सामाजिक समरसता के साथ ही मठ-मंदिरों के जरिये धर्म प्रसार के लक्ष्य की कड़ी के रूप में है। स्वामी भवानीनन्दन यति ने राष्ट्र धर्म को सबसे बड़ा बताते हुए कहा कि मानवता की सेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनायें। कहा कि राम ने अपने वन यात्रा के दौरान सामाजिक समरसता का अनूठा मिशाल पेश किया। यही कारण है कि वह मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाये। पत्रकारों ने संघ प्रमुख के आगमन को राजनीति से जोड़ते हुए महामंडलेश्वर के राजनीति में जाने के बारे में पूछा तो उन्होंने अदिगुरु शंकराचार्य की पुस्तक मठाम्नाय ग्रंथ का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीति में जाने की उनकी कोई इच्छा नहीं है। यह बात अवश्य है कि राजनीति और धर्म दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। वह एक संत के रूप में केवल सूत्र और सुझाव का कार्य करते हुए राजनीति के लोगों का मार्ग दर्शन करना चाहते हैं, न कि खुद राजनीति के मैदान में उतारने की इच्छा रखते हैं। स्वयं को सनातन धर्म और वैदिक परम्पराओं का कट्टर समर्थक बताते हुए निष्काम भाव से मठ के चतुर्दिक विकास और लोक कल्याण का कार्य करने की प्रतिबद्धता जताया। कहा कि महंत बनने के बाद से ही वह मठ के कठोर नियमों का पालन करते चले आ रहे हैं ऐसे में सन्यासी नियमों का पालन ही उनके लिये सर्वोपरि है। 

       सरसंघचालक के कार्यक्रम की रुपरेखा में वह बुधवार 19 जुलाई को वाराणसी के लंका कार्यालय से सुबह 09.30 बजे हथियाराम के लिए चलकर 11.15 बजे मठ पर पहुंचेंगे। यहां 11.30 बजे तक कक्ष में रहने के बाद 11.30 से 12.00 बजे तक दर्शन पूजन और दोपहर 12.00 से 12.30 बजे तक महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनन्दन यति महाराज से वार्ता करेंगे। दोपहर 12.30 से भोजन व विश्राम करने के बाद 04.00 से 04.45 तक ज्योतिर्लिंग एवं रुद्राभिषेक, 04.45 से 05.45 बजे तक मंचीय कार्यक्रम शामिल होंगे। रात 8.00 से 8.30 बजे तक महाराजश्री से संवाद तथा 08.30 के बाद भोजन, विश्राम करेंगे। दूसरे दिन 20 जुलाई को 07.30 बजे नवग्रह वाटिका का पूजन कर स्थापना करते हुए अक्षयवट, रुद्राक्ष, मौलश्री आदि दुर्लभ प्रजाति के वृक्षों का पौधरोपण करने आदि के बाद 09.00 काशी के लिये प्रस्थान कर जायेंगे।

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