डॉ  विजयानन्द भारत सरकार की ओर से जायेंगे फिजी

फिजी में भी गूंजेगी अब गाजीपुर की आवाज

गाजीपुर। हिंदी के सुपरिचित साहित्यकार,वैश्विक स्तर पर हिंदी के प्रचार प्रसार में संलग्न अखिल भारतीय हिन्दी महासभा, नईदिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विजयानन्द को विदेश मंत्रालय भारत सरकार ने प्रतिनिधि के रूप में फिजी भेजने का निर्णय लिया है। 

 

उल्लेखनीय है कि 12वां  विश्व हिंदी सम्मेलन 15 से 17 फरवरी तक नांदी (फिजी) में संपन्न होगा‌। इस समारोह में “हिंदी पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम मेधा तक” विषय पर दस सत्र निर्धारित हैं। 

             हिंदी महासभा के देश के सभी प्रदेशों के 80 प्रांतों के पदाधिकारियों, सदस्यों तथा गाजीपुर के बुद्धिजीवियों ने उन्हें इस साहित्य यात्रा के लिए हार्दिक बधाई दी है।

          ज्ञातव्य हो कि मनिहारी क्षेत्र के निवासी डॉ. विजयानन्द प्रयागराज में रह कर साहित्य सृजन कर रहे हैं। वे विभिन्न संस्थाओं में सचिव, महामंत्री, निदेशक- रिसर्च फाउंडेशन ,सं.इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय,नई दिल्ली,का०अध्यक्ष- अखिल भारतीय साहित्य परिषद, प्रयागराज,पूर्व अध्यक्ष – काशी प्रांत,राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, विश्व हिंदी महासभा, नई दिल्ली जैसे पदों पर कार्य कर चुके हैं। हिन्दी साहित्य की लगभग सभी विधाओं यथा- कविता,कहानी ,नाटक, उपन्यास,लघुकथा, बलआत्मकथा, आलोचना, समीक्षा,पत्र, संस्मरण, साक्षात्कार,बाल साहित्य, संपादन आदि में 54 मौलिक तथा अनुदित,संपादित कुल 81 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने ‘ वैश्विक साहित्य ‘ त्रैमासिक का लगभग दस वर्षों तक लगातार संपादन किया है। अमेरिका के रामकाव्य पीयूष, कृष्णकाव्य पीयूष सहित, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया,जापान सिंगापुर , मारीशस आदि अनेक देशों के संग्रहों,पत्र-पत्रिकाओं में उनकी रचनाएं प्रकाशित हैं।     उनकी कुछ महत्वपूर्ण पुस्तकों में संबोधन (काव्य संग्रह), शिवा-शौर्य (खंडकाव्य), समरभूमि ,श्रीकृष्ण चरित ( महाकाव्य), अंधेरे के खिलाफ,हरिओम तथा अन्य कहानियां (कहानी संग्रह) , अकिंचन,धर्मचक्र (एकांकी संग्रह), दानवीर कर्ण,वनवासिनी सीता ( नाटक), पितामह भीष्म, उबलता लहू , नेह निर्झर,लाजो ( उपन्यास), समय की सलीब पर-दो भाग(आत्मकथा), साहित्यकारों से साक्षात्कार, आलोचना का द्वंद्व और समीक्षा(आलोचना),प्यारा भारत,नन्हें मुन्ने गीत , देश हमारा,स्वतंत्रता के अमर शहीद, अपना गांव ( बाल साहित्य) आदि हैं। भारत के कई विश्वविद्यालयों में उनके साहित्य पर एम०फिल, पीएचडी का शोध कार्य हो चुका/ चल रहा है।वे अमेरिकन रिसर्च इंस्टीट्यूट के दो बार सलाहकार रहे। भारत सरकार,उत्तर प्रदेश सरकार सहित, देश विदेश की अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित एवं पुरस्कृत, यथा-अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘ हरिऔध ‘ पुरस्कार (मऊ,आजमगढ़), शकुंतला सिरोठिया बाल साहित्य पुरस्कार (इलाहाबाद), सूचना प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार का सम्मान,मोहन राकेश नाटक पुरस्कार ,बाल साहित्य सम्मान ( उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ ) ,भारतेंदु हरिश्चंद्र सम्मान (हिंदुस्तानी एकेडमी, प्रयागराज), हिंदी अकादमी,मुंबई का शिक्षारत्न सम्मान, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, अखिल भारतीय हिंदी महासभा, विश्व हिंदी महासभा, नईदिल्ली, राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान, विधान सभा, लखनऊ का पराग पुरस्कार आदि सहित देश-विदेश की अनेक संस्थाओं द्वारा कई दर्जन सम्मान एवं पुरस्कार उन्हें मिला है। सन 2001 में अमेरिकन बायोग्राफिकल इंस्टीट्यूट ने इन्हें अपने रिसर्च बोर्ड का सलाहकार  बनाया था।जिस पर इन्होंने कई बरसों तक सराहनीय कार्य किया है।

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