शतचण्डी यज्ञ में भाग लेकर अपने को धन्य कर रहे श्रद्धालु

गाजीपुर। जगद्जननी जगदम्बा के पूजन को समर्पित “शारदीय नवरात्रि” का महापर्व पूरे जनपद में श्रद्धालु भक्तों द्वारा उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा है। सभी देवी स्थलों पर श्रद्धालुओं द्वारा पूजन अर्चन लगातार जारी है।


माता रानी के पवित्र सिद्धपीठ वृद्धम्बिका माता सिद्धपीठ हथियाराम में चल रहे शतचण्डी यज्ञ के मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो रहा है। श्रद्धालु जनों द्वारा वृद्धंबिका माता तथा सिद्धेश्वरी माता का पूजन अर्चन का क्रम लगातार जारी है। माता मंडल परिसर की परिक्रमा श्रद्धालुओं द्वारा लगातार जारी है। मंदिर परिसर में पहुंचने वाले सभी भक्तजनों के लिए ओम मिशन चैरिटेबल ट्रस्ट आजमगढ़ द्वारा फलाहार की व्यवस्था पूरे नवरात्र भर के लिए की गई है।

आयोजक संदीप सिंह सोनू तथा उनकी टीम के अरविंद सिंह शैलेश कुमार बागी सुनील यादव लगातार प्रातः से लेकर संध्या तक श्रद्धालुओं के फलाहार की व्यवस्था में लगे हुए हैं तो वहीं मठ द्वारा संचालित महाभंडारे में प्रसाद ग्रहण कर लोग धन्य हो रहे हैं।
मठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनन्दन यति जी महाराज ने नवरात्रि की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नवरात्रि में व्रत, पूजन-अर्चन, साधना- उपासना और जागरण के माध्यम से मां की पूजा की जाती है। सच्चे मन और भक्ति भाव से की गई मां की पूजा कभी निष्फल नहीं जाती। जिस तरह बच्चा अनुनय विनय कर अपने मां को अंत में प्रसन्न कर लेता है, उसी तरह भक्त भी अपने मां से कुछ भी मांगने में संकोच नहीं करता है।

महाराज श्री ने कहा कि उपासना का अर्थ समीप बैठना अर्थात मां के सम्मुख बैठकर ध्यान लगाकर एकाग्र चित्त से अन्तःकरण की शुद्धि करना ही उपासना है। जिस प्रकार दूध में मक्खन है पर दिखता नहीं है। उसे पाने के लिए मेहनत से मंथन करना होता है,उसी प्रकार ईश्वर को पाने के लिए भी अपने भटकते मन पर काबू कर उसे गुरु कृपा से मथना पड़ता है। इसलिए हमें नवरात्रि में व्रत रखकर भक्ति भाव से मां का पूजन अर्चन करना चाहिए। इससे हमें अपनी विकृतियों को त्याग कर सत्कर्मों की ओर बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
मठ परिसर में आयोजित कार्यक्रम में पुजारी सर्वेश मिश्र,पप्पू पाण्डेय, अभयानंद गिरी, लवटू प्रजापति सहित स्वयं सेवकों की टीम श्रद्धालु भक्तों के सहयोग में लगी हुई है।

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