असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती – सवालों के घेरे में

प्रयागराज। अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर भर्ती के दौरान आयोग द्वारा नियमों की अनदेखी कर घोर अनियमितता बरती गई है।
उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा आयोग द्वारा नियम और शर्तों को ताख पर रखकर मनमाने ढंग से अभ्यर्थियों का चयन किया गया है और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश की अवहेलना भी की गयी है। उच्चतम न्यायालय के अनुसार अंक अधिक होने पर भी आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी अनारक्षित वर्ग में शामिल नहीं हो सकता है। इसके बावजूद उच्चतर शिक्षा आयोग ने कम अंक वाले आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी में चयन किया है।
बताया गया है कि आयोग के विज्ञापन संख्या 47 के समाजशास्त्र विषय में अनारक्षित वर्ग में चयनित 166 अभ्यर्थियों में से 5 अभ्यर्थी आरक्षित वर्ग के हैं। आरक्षित वर्ग के ये अभ्यर्थी अनारक्षित वर्ग के मानकानुरूप भी नहीं हैं अर्थात उनके अंक मास्टर डिग्री में 55% हैं ही नहीं। नियम व शर्तों के अनुसार अनारक्षित वर्ग में चयन होने के लिए मास्टर डिग्री में पचपन प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है।
इस अंधेरगर्दी का खुलासा तब हुआ जब बहुत कम अंकों से चयन से, वंचित अभ्यर्थियों ने सूचना अधिकार अधिनियम के तहत आयोग से सूचना मांगी। आयोग द्वारा आरटीआई के माध्यम से बताया गया कि अनारक्षित श्रेणी में 3 पिछड़े वर्ग के तथा 2 अनुसूचित वर्ग के अभ्यर्थियों का चयन किया गया है जिनके अंत मास्टर डिग्री में पचपन प्रतिशत से काफी कम हैं।
उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने के अनुसार अंक अधिक होने पर भी आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी अनारक्षित वर्ग में शामिल नहीं हो सकता है वंचित अभ्यर्थियों ने आयोग को आवेदन देकर तत्काल नियमानुसार कार्यवाही करने की मांग की है और कार्यवाही ना होने की दशा में न्यायालय में जाने की चेतावनी दी है।


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