कवि हौसिला प्रसाद की नयी रचना

कविवर तुमको पढ़ना होगा।
नया नया कुछ गढ़ना होगा ।।
संघर्षों के महासमर में ।
सबसे आगे चलना होगा।।


संयम वाला पाठ पढ़ाकर।
खुद संयम में रहना होगा ।।
अंधेरों में दीपक बनकर।
तुमको ही खुद जलना होगा ।।

पथ का सही प्रदर्शक बनकर।
साहस पूर्वक बढ़ना होगा ।।
ज्ञानदीप हो शब्दब्रह्म हो ।
खुद मशाल अब बनना होगा ।।

भटक रहे जो बीच राह में।
उनसे ही सच कहना होगा ।।
अंधेरा जो ले आते हैं ।
उनसे केवल लड़ना होगा ।।

शोषण का हर किला ढहाकर ।
आगे आगे बढ़ना होगा।
अत्याचारी हर निजाम को।
धूल धूसरित करना होगा।।

भारत के अद्भुत प्रभाव को ।
नए सिरे से गढ़ना होगा ।।
कर्ज मुक्त भारत का सपना ।
देख देखकर चलना होगा । ।

कवि कुल की मर्यादा का भी।
रक्षक हमको बनना होगा ।।
जनता में खुशहाली लाकर
वंदे मातरम कहना होगा ।।

कविवर तुमको पढ़ना होगा ।
नया नया कुछ करना होगा ।।
………………………अन्वेषी

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