धन्वन्तरी जयन्ती व धन त्रयोदशी आज

वाराणसी। इस वर्ष तिथियों के घटने का असर त्योहारों पर हो रहा है। इसी लिए धनत्रयोदशी (धन तेरस) को लेकर भी उपापोह की स्थिति बनी हुई है।धन त्रयोदशी प्रदोष व्यापिनी कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन मनायी जाती है। इस वर्ष आज दिनाँक 13 नवंबर 2020,शुक्रवार को सूर्योदय कालीन त्रयोदशी सांय काल 11:59 बजे तक रहेगी। इस दिन शुभ फल देने वाला चित्रा नक्षत्र रात्रि 11:06 बजे तक रहेगा।
हमारे यहां उदयातिथि में पड़ने वाले त्यौहारों को मनाने की परम्परा रही है जिसके चलते धनतेरस का पर्व आज ही मनाया जाएगा।
इस सम्बन्ध में दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी के अनुसार दृश्य गणित एवं प्राचीन गणित के पंचांगों के अनुसार धनत्रयोदशी (धनतेरस) गुरुवार एवं शुक्रवार को मनाई जाएगी। दोनों गणित के पंचांगों के तिथि में लगभग 3 घंटे का अंतर होने से यह पर्व दो दिन हो रहा है।
प्राचीन गणित के पंचांग के अनुसार कल 12 नवंबर (गुरुवार) को सायंकाल 6.30 बजे त्रयोदशी तिथि हो गयी है। वहीं दृश्य गणित के पंचागों के अनुसार गुरुवार को रात 21.30 बजे त्रयोदशी तिथि आने से 13 नवंबर (शुक्रवार) को प्रदोष व्यापिनी तिथि रहेगी। इसलिए शुक्रवार को धनत्रयोदशी पर्व मनाया जाना उचित होगा।
ज्योतिष के अनुसार शुक्रवार को धनतेरस का होना शुभ है। इस दिन चंद्र का भी संचार शुक्र की तुला राशि मे होना शुभ होगा। गोचर में शुक्र-बुध ग्रह का राजयोग भी बन रहा है जोकि धनतेरस पर कुबेर जी को प्रसन्न करने के साथ व्यापार शुभ कार्यों के आरम्भ करने के लिए भी अतिश्रेष्ठ रहेगा। इस दिन चर्तुमास की समाप्ति होगी।
आज धनत्रयोदशी के पूजन से दीपोत्सव पर्व का प्रारंभ होगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था, भगवान धनवन्तरि आयुर्वेद विद्या के जनक माने जाते हैं। समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वन्तरि इसी दिन समुद्र से हाथ में अमृत कलश लिये प्रकट हुए थे इसलिए इस दिन को धन्वन्तरि जयंती भी कहा जाता है। मान्यता है कि समुद्र मन्थन के समय शरद पूर्णिमा के दिन चन्द्र देव, कार्तिक द्वादशी के दिन कामधेनू गाय, त्रियोदशी के दिन भगवान धन्वन्तरि, चर्तुदशी तिथि के दिन माँ काली एवं अमावस्या के दिन महा लक्ष्मी का प्रर्दुभाव हुआ था। आज ही स्वास्थ्य के देव भगवान धन्वन्तरी के पूजन अर्चन का विधान है। दिवाली पूजा हेतु लक्ष्मी-गणेश, खील-बतासे आदि इसी दिन खरीदे जाते हैं। कार, दोपहिया, सोने-चांदी के सिक्के खरीदना अत्यंश शुभ होता है।
आज धनत्रयोदशी की रात में चौमुखा दीपक जलाने से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार में अकाल मृत्यु नहीं होती।
बर्तन-आभूषण खरीदने का शुभ मूहूर्त
प्रात: काल 06:44 बजे से 10:45 बजे तक चर, लाभ अमृतके चौघड़िया मुहुर्त में रहेगा। बर्तन एवं आभूषण क्रय मुहुर्त मध्याह्न 12:04 बजे से 13:24 बजे तक शुभ के चौघड़िया मुहुर्त एवं अभिजीत मुहूर्त में शुभ रहेगा।
यम दीप दान मुहुर्त सायं काल 5:32 से 6:45 बजे तक प्रदोष काल बेला की निशा मुख में शुभ रहेगा।
कुबेर पूजन मुहुर्त – रात्रि काल 8:44 बजे से रात्रि 10:24 बजे तक लाभ के चौघड़िया में शुभ रहेगा।


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