कसा शिकंजा ! बाहुबली मुख्तार अंसारी के नजदीकी की शम्मे हुसैनी हॉस्पिटल बिल्डिंग हुई ध्वस्त

गाजीपुर। बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के करीबियों व सहयोगियों पर शासन प्रशासन का आक्रामक रुख लगातार जारी है।
शहर के सदर कोतवाली क्षेत्र के गंगा नदी पर हमीद सेतु के किनारे स्थित शम्मे हुसैनी हॉस्पिटल बिल्डिंग को लाख कवायद के बावजूद अस्पताल प्रवन्धन बचा न सके। जिला प्रशासन के आदेश पर प्रशासनिक अधिकारियों व भारी पुलिस टीम की मौजूदगी में आज ढहा दिया गया।
बताते चलें कि पूरा कैंपस करीब 27 बीघे में स्थित है, जिसमें हॉस्पिटल, ट्रामा सेंटर, नर्सिंग कॉलेज, हॉस्टल, रेस्तरां, ट्रैक्टर का शो रूम तथा प्रशासनिक भवन मौजूद है।
बताते चलें कि गंगा नदी पर हमीद सेतु के किनारे स्थित शम्मे हुसैनी हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर प्रबंधन को जिलाधिकारी की अगुवाई वाली आठ सदस्यीय बोर्ड के कल शुक्रवार की शाम आये फैसले के बाद आज ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गयी। अवैध रूप से बनायी गयी बिल्डिंग को ध्वस्त करने के लिए दो पोकलेन और तीन जेसीबी के साथ ही काफी संख्या में मजदूर लगाये गये थे। ध्वस्तीकरण की कार्यवाही के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर वहां एडीएम, एएसपी के अलावा एसडीएम और कई पुलिस क्षेत्राधिकारी के साथ ही कई थानों की पुलिस फोर्स मौजूद रही।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के नियमों के तहद गंगा तट से 200 मीटर के दायरे में किसी भी तरह के पक्के निर्माण पर पूरी तरह से रोक है। इसके बावजूद उपरोक्त भवन नियमों को अनदेखी कर निर्मित किया गया था। एनजीटी के तय मानक की अनदेखी कर भवन और कैंपस के निर्माण को अवैध करार देते हुए उपजिलाधिकारी सदर प्रभास कुमार ने गत 8 अक्टूबर को हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया था। उन्होंने इसके लिए प्रबंधन को एक सप्ताह की मोहलत भी दी गई थी।
एसडीएम सदर के उस आदेश को हॉस्पिटल प्रबंधन ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने उस पर सुनवाई के बाद गत 14 अक्टूबर को अपने फैसले में कहा कि इस मामले में याची उचित न्यायिक तरीके अपनाये। एसडीएम के आदेश पर आपत्ति को डीएम के स्तर से दस दिन में निस्तारित किया जाए। उसके बाद हॉस्पिटल प्रबंधन ने जिलाधिकारी के न्यायालय में केस दायर कर एसडीएम सदर के आदेश पर रोक लगाने की अपील की। जिला एमपी सिंह ने इसके लिए अपनी अगुवाई में आठ सदस्यीय बोर्ड गठित कर हॉस्पिटल प्रबंधन की अर्जी पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया। बोर्ड के उस फैसले के बाद ही प्रबंधन ने रात में ही हॉस्पिटल सहित पूरे कैंपस को खाली करना शुरू कर दिया था।


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